Sunday, March 8, 2020

प्रधानमंत्री ने संबंधित मंत्रालयों के साथ कोविड-19 की स्थिति की समीक्षा की

माननीय प्रधानमंत्री ने 7 मार्च 2020 को सुबह 11:30 बजे नोवल कोरोनावायरस (कोविड-19) की स्थिति और इससे बचाव के लिए विभिन्न मंत्रालयों द्वारा अब तक की गई कार्रवाई की समीक्षा की। बैठक में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन,  केंद्रीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्‍य मंत्री श्री अश्विनी कुमार चौबे, कैबिनेट सविच श्री राजीव गौबा, नीति आयोग के सदस्‍य डॉ. विनोद के पॉल और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत उपस्थित थे। इस दौरान स्‍वास्‍थ्‍य, औषधि, नागर विमानन, विदेश, स्‍वास्‍थ्‍य अनुसंधान, गृह, जहाजरानी आदि मंत्रालयों के सचिव एवं अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।


स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव ने कोविड​-19 से निपटने के लिए तैयारी एवं प्रतिक्रिया के संबंध में वर्तमान परिस्थिति और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा अन्य सहायक मंत्रालयों द्वारा की गई कार्रवाई पर एक प्रस्तुति दी। इस प्रस्तुति में प्रवेश द्वार एवं समुदाय की निगरानी, प्रयोगशाला सहायता, अस्पतालों की तैयारी, लॉजिस्टिक्‍स और संचार के जोखिम जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर जोर दिया गया। औषधि विभाग के सचिव ने भारत में उपयोग के लिए दवाओं, एक्टिव फार्मास्‍युटिकल्‍स इनग्रेडिएंट्स (एपीआई) और अन्य सामग्रियों के स्‍टॉक की पर्याप्‍त उपलब्धता के बारे में जानकारी दी।


बैठक के दौरान सभी हवाई अड्डों, बंदरगाहों एवं बॉर्डर क्रॉसिंग पर लगातार सतर्क रहने की आवश्यकता से संबंधित मुद्दों, प्रोटोकॉल के अनुसार सामुदायिक स्तर पर निगरानी ​​और रोगियों को अलग रखने के लिए पर्याप्त बिस्‍तरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई। डॉ. हर्षवर्धन ने समय रहते पहल करने के लिए राज्यों के साथ प्रभावी समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया। नीती अयोग के सदस्‍य ने रोगियों को अस्पतालों में भर्ती करने के लिए क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही ईरान से भारतीयों को बाहर निकालने के लिए प्राप्त अनुरोध पर प्रकाश डाला गया।


माननीय प्रधानमंत्री ने अब तक किए गए कार्यों के लिए सभी विभागों की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारत को उभरते परिदृश्य से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहना होगा। सभी विभागों को आपसी तालमेल के साथ काम करना चाहिए और समुदायों के बीच इस बीमारी के बारे में जागरूकता फैलाने और सावधानियां बरतने के लिए पहल की जानी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को दुनिया भर में और विभिन्‍न देशों में कोविड-19 से निपटने के लिए अपनाई गई सर्वोत्तम प्रथाओं की पहचान और उन पर अमल सुनिश्चित करने के लिए प्रेरित किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि विशेषज्ञों की राय के मद्देनजर लोगों को सलाह दी जानी चाहिए कि वे जहां तक ​​संभव हो सामूहिक समारोहों से बचें। साथ ही क्‍या करें और क्‍या न करें के बारे में जागरूक रहें। उन्होंने इस बीमारी के फैलने की स्थिति में रोगियों को अलग-थलग करने और उन्‍हें गंभीर देखभाल की सुविधा उपलब्‍ध कराने के लिए पर्याप्त स्थानों की पहचान करने का काम तत्‍काल शुरू करने का निर्देश दिया। उन्‍होंने अधिकारियों को ईरान में फंसे भारतीयों की तत्‍काल जांच और उन्‍हें बाहर निकालने के लिए योजना बनाने का निर्देश दिया। उन्होंने सार्वजनिक स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से इस संक्रामक बीमारी के प्रबंधन के लिए पहले से ही विस्‍तृत योजना तैयार करने और समय पर प्रतिक्रिया देने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।



Saturday, March 7, 2020

नारी से ही स्वाभिमान है

पौराणिक शास्त्रों के अनुसार नारी शक्ति के रूप में खुद को स्थापित करती रही है। जिसमें माता को आदि शक्ति के रूप में माना जाता है उन्ही के अलग अलग रूपो का बखान हमें पढने को मिलता है।शिव शक्ति के वगैर अधूरे माने जाते है।उसी तरह हमारे इतिहास और राजा रजवाडो की कहानियो मे भी नारी की प्रधानता वीरता के कई वर्णन मिल जाते हैं ।स्वतंत्रता संग्राम की वीरांगनाओ मे महारानी लक्ष्मी बाई अर्थात झांसी की रानी को कौन भूल सकता है।कहने का तात्पर्य नारी व्यक्ति और समाज को शक्ति प्रदान करती है उसकी महत्ता को सभी को समझना होगा।

समाज में सम्मानपूर्वक जीवन जीने के लिए सबों को सामाजिक समरसता और मानसिकता में नरमी के साथ सबों के प्रति आदर का भाव रखना आवश्यक होगा विशेषकर महिलाओं के साथ। सामाजिक उत्थान और विकास के साथ शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ और रोजगार के लिए सरकार के साथ-साथ स्वंय में भी महिलाओं को प्रयास और सजगता लानी होगी।

आज हर समाज, अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहा है, उपहास और परिहास की दृष्टि से आज सामाजिक कार्यकर्ता को देखा जाने लगा है क्योंकि सामाजिक कार्यों मे उतनी चमक घमक नहीं है जितनी कि राजनीतिक या अन्य क्षेत्रो में है। संविधान में सभी नागरिकों को स्वतंत्रता, समानता, न्याय, शिक्षा, स्वास्थ, सुरक्षा, रोजगार, के लिए समान मौलिक  अधिकार प्रदान किए गए हैं। 

जबकि सामाजिक व्यवस्था और मान्यताओं के कारण ही आज परिवार और समाज हमें स्वीकार करता है। जिसके फलस्वरूप आज महिलाओ की स्थिति में पहले के मुकाबले काफी परिवर्तन भी हुए हैं लेकिन सुरक्षा की दृष्टिकोण से अभी भी व्यापक बदलाव की जरूरत है।आज की महिलायें सभी क्षेत्रों में अपना परचम लहरा रही है।कृषि कार्य,सेना,लेखन,डाक्टर,इंजीनीयर और राजनीति में भी वे अपनी जगह सुनिश्चत कर देश का नाम रौशन कर रही है।यह बदलाव आधी आबादी को ताकत के साथ निखार रहा है।वही चंद ऐसे वीभत्सकारी घटनाएँ भी होती रही है जिससे देश और समाज को शर्मसार होना पडा है।यह देश नारी सम्मान के लिए जाना जाता है जहाँ दुर्गा सरस्वती लक्ष्मी की पूजा की जाती है।पर असामाजिक तत्वो द्वारा विध्न डालने की प्रवृत्ति भी होती रही है जिसे शास्त्रो की भाषा में असुर समाज कहते है।यह असुर समाज आज भी है कोई चोर है कोई लुटेरा कोई दहेज लोभी कोई बालात्कारी भ्रूण हत्या तो कोई उत्पीडन करने वाला।देश में बढती बालात्कार की घटना चिंता का विषय है जो सरकार को वेचैन करने वाली रही है।दहेज और महिला उत्पीडन की भी घटनाये चिता मे डालती प्रतीत होती है।बढता शराब का प्रचलन तथा नेट पर बढते अश्लील शार्ट फिल्म ने तो इन घटनाओ को और अधिक प्रोत्साहन दिया है जहाँ खुलकर अश्लीलता परोसी जाती है।ऐसे फीचर को कठोर और सख्त नियम के तहत बंद की जानी चाहिए।

आज भी महिलाओं की स्थिति बहुत अच्छी नही है। देश में अनेक जनकल्याणकारी योजनायें और निःशुल्क अनाज राशन आवास गैस आदि का प्रावधान होने के बावजूद भी कई लोग बदहाल हैं। देश में सामाजिक शिक्षा का अलग से कोई प्रबंध नहीं है, इसे हम देखकर, पढकर, ऐतिहासिक, नैतिक कार्यो का अध्ययन कर और बडो के संगत से ही ग्रहण कर सांस्कृतिक मर्यादा का पालन करते हुए निवर्हन करते हैं। जिसमें महिलाओं का सम्मान,सभी धर्मों का सम्मान,बडो का आदर,आपसी भाइचारे, संस्कृति का सम्मान व रक्षा, देश के प्रति समर्पण का भाव और सभ्यता के प्रति आत्मविश्वास के साथ पीढी दर पीढी आगे ले जाने की असीम प्रेरणा मिलती है ताकि सभी लोग समाज की मुख्यधारा में सम्मानपूर्वक जीवनयापन कर सकें साथ हीं सामाजिक उपेक्षा का कोई भी शिकार न हो सके। संविधान में भी सभी के लिए समान अवसर की बात कही गई है। शिक्षा, प्रशिक्षण और कौशलयुक्त होकर आज महिलाओ को घर से बाहर निकलना पडता है जहाँ उन्हें नित्य मुश्किलो का सामना करना पड़ता है। सरकार महिलाओं के विकास और रोजगार प्राप्ति के लिए अनेक योजनाएं संचालित कर रही है, पर दुर्भाग्य है कि आज भी वे बदहाल की स्थिति में हैं। योजना का लाभ तो दूर उन्हें योजना की जानकारी तक नहीं होती, या होती भी है तो उस स्तर तक वे पहुँच ही नही पाते। फलस्वरूप  योजना का लाभ उन्हें नही मिल पाता जिनके लिए योजनायें है।

समानता की गरिमा का ख्याल करते हुए  उन लोगो को समान अधिकार  मिले और समाज में समानता और समरसता तभी स्थापित होगी जब आधी आबादी को मजबूत किया जाएगा। 

    इक्कीसवीं सदी में भी वंचित महिलायें आधुनिकताओं  में जीने के लिए समाज में अपना घर तलाश रही है । वह चिता करने वाला है अतः आशा करनी चाहिए इन सभी विसंगतियो पर पूर्ण विराम की स्थिति हो। इनको दूर करने की दिशा में सरकार सकारात्म कदम के साथ कठोर कार्रवाई भी कर रही है जिससे खोया हुआ आत्मविश्वास पुनः लौटने लगी है । 

आधी आबादी के लिए सरकार द्वारा कई कदम उठाये गये हैं जिनमें तीन तालाक, आरक्षण, महिला आयोग, पुलिस में महिला की नियुक्ति का कोटा, निकाय चुनावो में आरक्षण आदि शामिल हैं । आज हमारे संसद में भी महिलाओं की वृद्धि हुई है जो अपनी हक की बात वखूवी रख रही है ।लेकिन अभी भी महिला आरक्षण बिल का पास होना बाकी है।आत्म सुरक्षा के लिए भी मार्शल आर्टस ट्रेनिंग के जरिये भी आजकल मोर्डन स्कूलो में ट्रेनिंग दी जाती है जो निश्चित ही आने वाले दिनो में कारगर साबित होगी।

 अतः कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि पहले की अपेक्षा आज महिलाओं की उपस्थिति हर क्षेत्र में बढ़ रही है।राहे कठिन जरूर है पर उपस्थिति नगण्य नही जो भविष्य के लिए शुभ संकेत देते है और हमें मुस्कुराने का मौका भी।

 

शक्ति स्वरूप नारी

न क्रुंदन करती ना ही चित्कार करती

कभी न किसी को  वो तिरस्कार करती।

 

रूप बदलकर आती, सभी अवस्थाओ में वो तो सिर्फ हृदय से, हमें प्यार करती।

 

शक्ति की प्रगाढ़ता, जीवन की मौलिकता

आधार बनकर जीवन में वास करती।

 

सच्चाई की मिशाल, विश्वास में विशाल

छल कपट भी, मुस्कुरा के टाला करती।

 

वो काया कितनी महान, जिसमें सारे गुण

पर मानवता, इनका दिल तोड़ा करती।

 

बड़ा शर्मसार होना पड़ता देश को 

जब दरिंदगी भी यहाँ निवास करती।

 

न्याय के लिए सच और झूठ तौला जाता

वेतुके तर्क से इन्हें और टाला करती।

 

शक्ति की धरोहर की यह पीड़ा 

जब हद से पार हुआ 

फांसी पर लटका दो

संसद के दोनों सदनों से पास हुआ।

 

धरती हो या अम्बर जुल्म नही चलेगा

नारी शक्ति के आगे फांसी नहीं टलेगा।

 

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर सभी एएसआई संरक्षित स्मारक मुफ्त घूम सकेंगी भारतीय और विदेशी महिला आगंतुक - श्री प्रहलाद सिंह पटेल

केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री प्रहलाद सिंह पटेल ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर ताजमहल सहित सभी एएसआई संरक्षित टिकट स्मारकों को सभी भारतीय और विदेशी महिला आगंतुकों के लिए मुफ्त करने की घोषणा की है। श्री पटेल ने कहा कि भारत में महिलाओं को सम्मान देने की एक महान परंपरा रही है और हम मानते हैं कि जहां महिलाओं को उचित सम्मान दिया जाता है, वहीं पर देवता भी निवास करते हैं और जहां महिलाओं को सम्मान नहीं मिलता है, वहां सभी कार्य निष्फल रहते हैं।


उन्होंने कहा कि यह संस्कृति मंत्रालय की ओर से विश्व की नारी शक्ति के लिए एक छोटा सा उपहार है। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण अपने स्मारकों पर आने वाली महिलाओं की सुरक्षा के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि इस दिशा में 29 अगस्त 2019 को आगरा के ताजमहल परिसर में उनके द्वारा एक बेबी केयर एंड फीडिंग रूम का उद्घाटन किया गया था और इसके बाद पूरे भारत में विभिन्न स्मारकों में इसकी स्थापना की गई थी।


उन्होंने कहा कि इन स्मारकों पर महिला आगंतुकों को सुरक्षित और सुविधाजनक अनुभव प्रदान करने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने निम्नलिखित प्रावधान किए हैं:-


भारत भर के विभिन्न स्मारकों में बेबी फीडिंग रूम / चाइल्ड केयर सेंटर।


- स्मारकों पर आने वाली महिलाओं के लिए स्वच्छ शौचालय की सुविधा।


- महिलाओं की सुरक्षा के लिए महिला सुरक्षा गार्ड की तैनाती।


- लाल किला और ताजमहल जैसे कुछ प्रमुख स्मारकों में टिकट / टोकन खरीदने वाली महिलाओं के लिए अलग कतार।


- लाल किला और ताजमहल जैसे कुछ प्रमुख स्मारकों में महिलाओं के लिए अलग प्रवेश और निकासी द्वार।


- एएसआई और सीआईएसएफ के कर्मचारियों के लिए लैंगिक संवेदनशीलता जैसे विषयों पर नियमित रूप से बातचीत सत्र जैसी विशेष पहल।


- महिला यात्रियों की तलाशी के लिए प्रवेश द्वार पर महिला सुरक्षा कर्मियों की तैनाती।