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योग
June 20, 2020 • Brajesh Kumar Mourya • कविता
परंपरा का आधार 
ऊर्जा शक्ति अपार।
 
पाते स्वास्थ लाभ
करते  योगाभ्यास
 
तन का आधार  
रोग मुक्त का द्वार
 
एकाग्रचित मन 
शुद्ध तन निर्मल ।
 
जीवन है अनमोल 
दे   दो  कुछ   पल।
 
दे   आत्म    शुद्धि 
इससे  बढे   बुद्धि ।
 
चंचल मन बस में रहे
पास न आवे कुबुद्धि।
 
पौराणिक पर गुणी है 
रोगो की यह औषधि है ।
 
लेना देना कुछ नही
खर्च कोई लगता नही।
 
कई आसन है करने 
समय थोडा ही लगते ।
 
अपनाओ जीवन में सभी
रहो    चंगे    लगो  प्यारे।
 
                       आशुतोष 
                     पटना बिहार