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तेरे लिए
May 30, 2020 • Brajesh Kumar Mourya • कविता
टिक टॉक बंद हुआ कोरोना तेरे लिए, 
विदेशी वस्तु बंद हुई कोरोना तेरे लिए। 
 
बच्चों की पढ़ाई बंद पड़ी कोरोना तेरे लिए, 
बच्चों की क्रीड़ा बंद हुई कोरोना तेरे लिए। 
 
कोई घूमने नहीं जा रहे कोरोना तेरे लिए, 
आज अपने अपनों से भय रहे कोरोना तेरे लिए। 
सभी की नौकरी गई कोरोना तेरे लिए। 
 
मोहब्बत में दरारें आई कोरोना तेरे लिए, 
गरीब मजदूरों की जानें गई कोरोना तेरे लिए, 
गरीब भूख हेतु आत्महत्या करते कोरोना तेरे लिए। 
 
मजदूर लोग पलायन किए कोरोना तेरे लिए, 
सभी आत्मनिर्भर बन गए कोरोना तेरे लिए। 
 
मधुशाला फिर से खुली कोरोना तेरे लिए, 
बाकी का व्यापार बंद पड़ा है कोरोना तेरे लिए। 
 
एक दूसरे से दूरी बना रहे कोरोना तेरे लिए, 
मोहब्बत बीमार पड़ गई कोरोना तेरे लिए। 
 
अभी लड़की लड़कों में फेसबुक पर चैट होती,
लड़की कहती मेले बाबू थाना थाया कोरोना तेरे लिए। 
 
गर्लफ्रेंड बॉयफ्रेंड में फेस टू फेस बात नहीं होती,
लड़की लोगों के लूटने का धंधा बंद पड़ा है कोरोना तेरे लिए। 
 
हर किसी का भविष्य संकट में पड़ा कोरोना तेरे लिए, 
सभी की खुशी छीन गई कोरोना तेरे लिए। 
मो. जमील
अंधराठाढ़ी, मधुबनी (बिहार)