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निर्वस्त्र हो रही धरती यह, हे बजरंगबली महराज
May 18, 2020 • Brajesh Kumar Mourya • कविता
इस जग के तुम कर्ता - धर्ता,
हे  बजरंगबली  महराज।
इस जग पर उपकार करो तुम,
हे  बजरंगबली  महराज।
पल-पल में हो परिवर्तन करते, 
हे  बजरंगबली  महराज।
अब तो सुन लो विनती सबकी,
हे  बजरंगबली  महाराज।
निर्वस्त्र हो रही है धरती यह,
हे  बजरंगबली  महराज।
निज हो रहा प्रकृति का दोहन,
हे  बजरंगबली  महराज।
वातावरण है अब शुद्ध हुआ,
हे  बजरंगबली  महराज।
अब तो सुन लो विनती सबकी,
हे  बजरंगबली  महाराज।
सबका अब कल्याण करो तुम,
हे  बजरंगबली  महराज।
मानव से मानव का मिलन हो,
हे  बजरंगबली  महराज।
कोरोना  को  मार  भगाओ, 
हे  बजरंगबली  महराज।
अब तो सुन लो विनती सबकी,
हे  बजरंगबली  महाराज।
कलियुग के अवतारी हो आप,
हे  बजरंगबली  महराज।
राम  भक्त  अवतारी हो आप ,
हे  बजरंगबली  महराज।
सीता माता को ढूढ़ने वाले आप,
हे  बजरंगबली  महराज।
अब तो सुन लो विनती सबकी,
हे  बजरंगबली  महाराज।
शुभम  श्रीवास्तव