ALL उत्तर प्रदेश बिहार मध्य प्रदेश लेख कहानी कविता अन्य खबरें न्युज
मुख्यमंत्री श्री चौहान द्वारा तकनीक से संवाद और समाधान
May 21, 2020 • Brajesh Kumar Mourya • मध्य प्रदेश
शिवपुरी, 21 मई 2020/ केन्द्र सरकार के लॉकडाउन फैसले के बाद मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के सामने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए मुश्किल वक्त में प्रदेश में गुड गवर्नेंस स्थापित करना बड़ी चुनौती थी। सुदीर्घ शासकीय अनुभव वाले मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने इस चुनौती को स्वीकारा और नेशनल इनफॉर्मेटिक सेंटर की व्यवस्था और सोशल मीडिया को अपना जरिया बनाया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने 81 वीडियो कॉन्फ्रेंस में अलग-अलग वर्गों से कुल 149 घंटो का संवाद किया। इस व्यवस्था के तहत श्री चौहान ने अपने और अधिकारियों एवं प्रदेश की जनता के बीच संदेश सेतु बनाया। संचार की इस आधुनिकतम तकनीक से शासन और आम जनता के बीच में बेहतर और निरंतर संवाद स्थापित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने संचार के सभी माध्यमों को अपनाते हुए सोशल मीडिया का भी भरपूर उपयोग किया है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने अपने फेसबुक एकाउण्ट पर 23 मार्च सेआज दिनांक तक ट्विटर पर 58, फेसबुक पर 108 से अधिक वीडियो पोस्ट किए गए, 22 लाइव इवेंट के माध्यम से मध्य प्रदेश की जनता से सीधी चर्चा की गई। इसके साथ ही फेसबुक पर करीब 8 करोड़ रीच हुई, प्रतिदिन 13 लाख इंप्रेशन फेसबुक हैंडल पर मिले और ट्विटर पर 23 लाख इंप्रेशन प्राप्त हुए। इसके अलावा सीएमओ के फेसबुक अकाउंट पर 23 मार्च के बाद से अब तक मुख्यमंत्री श्री चौहान द्वारा कोरोना संकट की रोकथाम व अन्य व्यवस्थाओं को लेकर लिए गए महत्वपूर्ण फैसलों व दिशा-निर्देशों की जानकारियों से संबंधित 125 से अधिक वीडियो पोस्ट की गई, जिनकी अन्य पोस्ट के साथ मिलाकर रीच करीब 4 करोड़ 65 लाख है। साथ ही सीएमओ के ट्विटर अकाउंट पर इस दौरान इंप्रेशन करीब 14.2 मिलियन रहे। एक बड़े संवाद सेतु के साथ कोरोना के युद्ध में महायोद्धा बन कर शिवराज सिंह चौहान डिजिटल मैदान में उभरे हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान के सोशल मीडिया एकाउण्ट जारी होने वाली सूचनाओं और जनहित के निर्णयों की जानकारी होने से उनका फेसबुक एवं ट्विटर एकाउण्ट काफी लोकप्रिय भी हो रहा है।
कोरोना महामारी के प्रकोप का सामना करने के लिए मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान अपने कुशल प्रशासनिक अनुभव और सूझ-बूझ के साथ सूचना एवं संचार तकनीक का पूरा इस्तेमाल कर रहे हैं। इस दिशा में एन.आई.सी. की टीम सक्रिय रूप से कार्य कर रही है। एन.आई.सी. के सीनियर टेक्निकल डायरेक्टर श्री मयंक नागर ने बताया कि एन.आई.सी. द्वारा संभाग एवं जिलों के अधिकारियों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की व्यवस्थाओं को सुनिश्चित किया जाकर सोशल डिस्टेंसिंग के साथ त्वरित संवाद सुनिश्चित कराया गया।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर प्रदेश के हर वर्ग के लोगों से जुड़ कर संवाद स्थापित किया है। मुश्किल समय में अब तक 81 वीसी के माध्यम से मुख्यमंत्री अपने अधिकारियों के संपर्क में तो हैं ही, साथ ही प्रतिदिन इस तकनीक का इस्तेमाल कर उन्होंने विभाग प्रमुख, संभागायुक्त, कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, शासकीय अधिकारियों, समाज सेवी संस्थाओं, चिकित्सकों, मीडिया प्रतिनिधियों, पुलिस अधिकारियों, उद्योगपतियों, धर्मगुरूओं, किसानों और कोरोना से जंग जीतकर लौट रहे मरीजों सहित शासन की योजनाओं में लाभान्वित हितग्राहियों से चर्चा कर उचित कदम भी उठाये हैं।
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने NIC की ई-पेमेंट पोर्टल के माध्यम से बाहर राज्यों में फंसे मजदूरों, मिड डे मिल के रसोईयों, खाद्यान्न सुरक्षा भत्ता, विद्यार्थियों को छात्रवृति की राशि समेत कई योजनाओं के हितग्राहियों को भुगतान किया। कोविड-19 की परिस्थितियों को देखते हुए मुख्यमंत्री श्री चौहान ने जनहित के कई निर्णय भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में ही लिये, इसमें जीवन अमृत योजना, जीवन शक्ति योजना, अप्रवासी श्रमिकों के लिये जॉब कार्ड योजना शुरू करने का भी निर्णय लिया। इसके साथ ही विभिन्न योजनाओं में 6 हजार 489 करोड़ की राशि हितग्राहियों के खाते में ट्रान्सफर की। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने समर्थन मूल्य पर किसानों से क्रय किये जा रहे गेहूँ, चना एवं मसूर की खरीदी पर भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रतिदिन समीक्षा की, जिसके परिणामस्वरूप प्रदेश में अल्प अवधि में गेहूँ उपार्जन का रिकार्ड कायम किया। गेहूँ उपार्जन के साथ किसानों को समय पर भुगतान की कार्यवाही भी सुनिश्चित की गई।
कोरोना संकट में संवाद सेतु के रूप में कार्य कर रहे राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र (NIC) का उपयोग मुख्यमंत्री के अलावा प्रदेश के मुख्य सचिव श्री इकबाल सिंह बैंस ने भी किया। उन्होंने 38 वीडियो कॉफ्रेंसिंग के जरिये 53 घंटों तक अधिकारियों के साथ ऑनलाइन मीटिंग की है। वहीं स्वास्थ्य, खाद्य, सहकारिता, चिकित्सा शिक्षा, वन, वित्त विभागों द्वारा भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और वीडियो कॉलिंग तकनीक का इस्तेमाल कर कोविड-19 से बचाव के लिए किए जा रहे कार्यों की समीक्षा की गई।