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मैं शिक्षक हूं
May 18, 2020 • Brajesh Kumar Mourya • कविता

  मन में स्नेह

और उनमें एक विश्वास
बच्चे के भविष्य का ख्याल 
एक प्रयास और देता पूरा समय 
हां , मैं एक शिक्षक हूं ।

चलता मैं नित दिन 
बुनता बच्चों के सपने 
बोलते - बोलते थक सा जाता हूं 
फिर भी  मन में , ख्याल यही रहता 
बस सब बच्चों को , ठीक से समझा पाउ 
हां , मैं एक शिक्षक हूं ।

जोड़ - घटाओं की ओ पटरी 
कोई अल्फा - बीटा और साथ में ठीटा 
फिकर यही रहता , क्या समझा पा रहा हूं 
बच्चों के चेहरे पर क्या हंसी ला रहा हूं 
सीख जाए कोई समाधान 
बस इतनी सी कोशिश 
नित दिन करता जाता हूं ,
बच्चों के खाब बुनने वाला 
हां , मैं एक शिक्षक हूं ।