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महासागर दिवस का बढ़ता महत्व
June 8, 2020 • Brajesh Kumar Mourya • लेख

8 जून को बनाए जाने वाले विश्व महा सागर दिवस कि अपनी बहुत अधिक महत्वता रही है। एक ओर जहां हम अपनी गलतियों को समझ अपने द्वारा प्रदूषण को रोकने का प्रयास कर रहे हैं ताकि पर्यावरण को होने वाले नुकसान से बचाया जा सके वही दूसरी ओर पर्यावरण का महासागर से बहुत ही घनिष्ठ संबंध है। बिना महासागर पर्यावरण संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है।  जलवायु और मौसम प्रणाली को संचलित करने में प्रशांत, अटलांटिक, भारतीय, आर्कटिक और दक्षिणी महासागर हैं। यही कार्बन उत्सर्जन को अवशोषित करके जलवायु परिवर्तन के, प्रतिरोध के रूप में भी कार्य करते हैं।

महासागर पृथ्वी का जीवन है। यह पृथ्वी के लिए फेफड़ों के समान कार्य करते हैं। यहीं से सम्पूर्ण पृथ्वी को ऑक्सीजन प्राप्त होती है। महासागर दिवस का मुख्य कारण लोगों को महासागरों के प्रति जागरूक करना है। हम सभी जानते हैं कि हमें समुद्र से ही बड़ी मात्रा में भोजन और दवाएं प्राप्त होती है। किन्तु प्लास्टिक से महासागर प्रदूषित हो रहें हैं और साथ ही महासागर में रहने वाले जीव प्लास्टिक को अपना भोजन समझ खा लेते हैं। जिसके चलते उन्हें अपने जीवन से हाथ धोना पड़ता है।  जिसके कारण हम कई आवश्यक प्रजातियों को नुक्सान पहुंचा रहे हैं। इस लिए हमें महासागरों की सुरक्षा करने की आवश्यकता है।

पूरे ब्रह्माण्ड में केवल पृथ्वी ही एक ऐसा ग्रह है जहां पर जीवन संभव है। जिसका मुख्य कारण यह है कि पृथ्वी पर महासागर है। महासागर के होने के कारण पृथ्वी का तापमान काबू में है। यदि पृथ्वी पर महासागर नहीं होते तो पृथ्वी का तापमान इतना अधिक हो जाता कि यहां पर जीवन का होना असम्भव हो जाता। महासागर के जल की लवणता और विशिष्ट ऊष्माधारिता का गुण पृथ्वी के मौसम को प्रभावित करता है। मौसम के संतुलन में महासागर जल की लवणता जीवन के लिये एक वरदान है। यह अपने अंदर सुर्य की उर्जा का एक बहुत बड़ा हिस्सा समा लेती है। जिसके चलते पृथ्वी का तापमान जीवन योग्य बना रहता है।

पृथ्वी का बढ़ता तापमान और  महासागर में बढ़ता बढ़ता प्रदूषण हमारे लिए ख़तरे की निशानी है। महासागर बहुत अधिक मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड को अपने अंदर शोषित करते हैं। जिसके चलते पृथ्वी में संतुलन बना रहता है। किन्तु यदि इसी प्रकार से महासागरों में प्रदूषण बढ़ता रहा तो उनके द्वारा कार्बन डाइऑक्साइड को शोषित करने में परेशानी आएगी और वह पृथ्वी का तापमान बढ़ जाएगा। 

महासागरों में सबसे अधिक प्रदूषण उसके तटीय क्षेत्रों में देखने को मिलता है। यह मानवीय गतिविधियों के कारण हो रहा है। महासागर जल में भारी मात्रा में प्रदूषणकारी तत्वों के मिलने से इन स्थानों पर जीवन संकट में है।  बहुत से तटीय क्षेत्रों के आस पास पाई जाने वाली प्रजातियों का जीवन असुरक्षित होता जा रहा है। महासागर में चलने वाले तेल वाहक जहाजों से जब महासागरों में तेल का रिसाव होता है। तब महासागर में एक मटमैली सतह बन जाती है। जिसके चलते सूर्य का प्रकाश महासागर की गहराई तक नहीं पहुंच पाता है और वह जीवन को पनपने में परेशानी होती है। जिसके चलते उस स्थान पर जीवन खत्म हो जाता है।  ऐसे स्थानों पर जैव विविधता भी प्रभावित होती है।

पूरी दुनिया को प्रभावित करने वाले कोविड-19 ने महासागर को भी प्रभावित किया और सालों से प्रदूषण का शिकार होने वाले हमारे महासागरों में प्रदूषण की कमी हुई जिसके चलते महासागर में रहने वाले जीवों को जीवन दान की प्राप्ति हुई और हमें यह सोचने का अवसर प्राप्त हुआ। कि हम किस प्रकार से अपने द्वारा पर्यावरण को सुरक्षित रखने के उपाय कर सकते हैं। हमें जरूरत है ऐसे फैसले लेने की जिस पर चल कर हम अपनी पृथ्वी को बचा सकें। महासागरों के लिए सबसे बड़ी परेशानी बन चुका प्लास्टिक कचरे पर हमें रोक लगाने की आवश्यकता ही नहीं है। साथ ही कठोरता से उस कानून का पालन करने की जरूरत है।

यदि आप महासागर के पास नहीं रहते हैं या फिर एक आम व्यक्ति हैं, यह सोच अपनी जिम्मेदारियों से बच नहीं सकते हैं। हमें सरकार के फैसले लेने का इंतेज़ार नहीं करना चाहिए। हमें अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। अधिक से अधिक कोशिश करें ऐसी वस्तुओं का प्रयोग करें जिससे पर्यावरण को नुक्सान ना पहुंचे। कपड़े और अखबारों से बनें थैलों का प्रयोग करें। जहां तक हो सके प्लास्टिक बैग और प्लास्टिक से बनी वस्तुएं प्रयोग ना करें।

किसी अन्य के लिए नहीं स्वयं के लिए विचार करें। जीवन अनमोल है उसे अपने लालच और स्वार्थ की भेंट ना चढ़ाएं। प्रदूषण को रोकने में अपना सहयोग दे। स्वस्थ और खुशहाल जीवन जिएं। 
         राखी सरोज