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लखनऊ के ठाकुरगंज क्षेत्र बालागंज में कोरोना का मरीज मिलने  पर पूर्व नामित पार्षद अजीत सिंह  ने सरकार पर साधा निशाना
June 10, 2020 • Brajesh Kumar Mourya • उत्तर प्रदेश
पुष्पेन्द्र सिंह संवाददाता दैनिक अयोध्या टाइम्स लखनऊ
लखनऊ :- समाजवादी पार्टी के पूर्व नामित पार्षद वार्ड बालागंज मे कोरोना का मरीज मिलने पर  सरकार व प्रशासन पर लगाये गम्भीर आरोप बालागंज मे कोरोना मरीज मिलने पर सरकार  के द्वारा कोई भी आवश्यक कार्यवाही नही की गई है जिससे छेत्र व मोहल्ले मे दहसत का माहौल है लोग घरो मे कैद होने पर मजबूर है न ही स्वास्थ्य विभाग द्वारा छेत्र को सेनेटाईज किया गया है न ही किसी की भी जांच की गई श्री सिंह ने कहा सरकार सिर्फ सारा कार्य मीटिंग व कागज पर ही कर रही है आयुष मंत्रालय की तरफ़ से TV पर दिखा रहे हैं कि कोरोना से बचने के लिए काढ़े व च्यवनप्राश का सेवन करना चाहिए. यदि ये वैज्ञानिक रूप से सिद्ध उपाय हैं तो संकटकाल में सरकार इनकी मुफ़्त आपूर्ति करे.आरोग्य सेतु’ का उपयोग करने पर ये पुरस्कार स्वरूप दिये जाएं तो लोग प्रोत्साहित होंगे.मुख्यमंत्री जी की ‘दिव्य राजनीतिक गणित’ के हिसाब से यदि मुंबई-महाराष्ट्र से लौटे 75%, दिल्ली से लौटे 50% अन्य राज्यों से लौटे 25% लोग कोरोना-संक्रमित हैं तो फिर पचीसों लाख लौटे लोगों को मिलाकर उप्र में कोरोना का प्रकाशित आँकड़ा कुछ हजार ही क्यों है.कुछ तो है जिसकी पर्दादारी है!कोरोनाकाल की आर्थिक तंगी से उपजे अवसाद के कारण युवाओं की आत्महत्याओं की ख़बरें दुखद हैं. आज सरकार की असंवेदनशीलता व दिशाहीन नीतियों की वजह से जो निराशा फैल रही है, वो चिंता का विषय है.अपने संकल्प व सच्चे नेतृत्व से जनता में विश्वास जगाये रखना भी सरकारों का ही दायित्व होता है.सरकार बस इतना बता दे कि 20 लाख करोड़ के तथाकथित ‘महापैकेज’ में कितना ग़रीब के लिए है कितना किसान, दिहाड़ी-प्रवासी मज़दूर, छोटे व्यापारी, खुदरा कारोबारी, रेड़ी-ठेले-पटरीवाले व अन्य मजबूरों के लिए है.समाज को बाँटने मे माहिर लोग कृपया करके इस आर्थिक बँटवारे का हिसाब भी दे दें.उप्र में प्रसव के लिए अस्पताल खोजते-खोजते एक गर्भवती महिला की मृत्यु अति दुखद है. सरकार यह बताए कि अगर वो कोरोना के लिए 1 लाख बेड के इंतज़ाम का दावा करती है तो आनेवाली पीढ़ियों के लिए कुछ बेड आरक्षित क्यों नहीं रखे. भाजपा सरकार ये भी बताए कि उसने अब तक कितने अस्पताल बनाए हैं. भाजपा बिहार में दूर से ही डिजिटल चुनावी रैली कर रही है क्योंकि उसने देश और देशवासियों की जो बर्बादी की है उसकी वजह से वो जनता के बीच सीधे जाने के लायक बची ही नहीं है.करोड़ों लोगों की ज़िंदगी को रास्ते पर लाने की तैयारी के बजाय भाजपाई चुनाव की तैयारी में जुट गये.जो की  शर्मनाक है !