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कृषि में कौशल विकास की चुनौतियां 
September 17, 2020 • Brajesh Kumar Mourya • लेख
हम सभी जानते हैं कि दोस्त किसी भी देश के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए कौशल और ज्ञान दो प्रेरक बल होते हैं। हमारा भारत कृषि प्रधान देश होने के साथ-साथ ही वैश्विक स्तर पर भी सबसे अधिक युवाओं वाला देश भी है। कृषि क्षेत्र में हमने आजादी के बाद एक लंबा  संघर्ष भरा सफर तय किया है। आज दोस्त हरित क्रांति तथा कृषि वैज्ञानिकों के अनुसंधान तथा प्रसार ने भारत को न सिर्फ खाद्यान्न में  बल्कि दुग्ध उत्पादन में भी विश्व के शिखर में खड़ा कर दिया है और आज भारत फल एवं सब्जियों में दूध , मसाले एवं जुट में वैश्विक स्तर पर सबसे बड़ा उत्पादक देश है। अगर हम धान एवं गेहूं में देखें तो हमारा भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक एवं वैश्विक स्तर पर भारत 80% से अधिक फसलों के सबसे बड़ी उत्पादकों में से आज एक है। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि हरित क्रांति रणनीति द्वारा भारत में कृषि क्षेत्र के विकास के लिए कृषि उत्पादन बढ़ाने और देश की खाद्य सुरक्षा में सुधार लाने पर जोर दिया गया था, जो आज अनाजों से हमारा भंडारण भरा हुआ है। परंतु दोस्तों आज समय की यह मांग है की खाद्य सुरक्षा में सुधार के साथ-साथ अधिक आय अर्जित कराना भी होगा किसानों को क्योंकि आप यह देख रहे हैं कि आए दिन हमारे अन्नदाता आत्महत्या कर रहे हैं। इसके साथ ही पर्याप्त भंडारण क्षमता को भी और अधिक सुदृढ़ करना होगा क्योंकि हम यह भी देख रहे हैं कि पर्याप्त भंडारण नहीं होने के कारण भी अनाज बर्बाद हो जाते हैं कभी-कभी तो राजनीतिक उदासीनता के कारण भी अनाज गोदामों में सड़ते रहते हैं लेकिन हमारा देश भुखमरी में सबसे ऊपर बना रहता है इन सब में सुधार करने की अत्यंत आवश्यकता है।
आप ही देखो ना दोस्तों जहां एक तरफ हमारा भारत ने विश्व में अपने आप को कृषि उत्पादन में साबित किया है वही हम देख रहे हैं दूसरी तरफ हमारे देश में अधिकतर किसान कृषि त्यागना चाहते हैं तथा युवा वर्ग तो गांव में कृषि को त्याग कर शहरो में नौकरी करने हेतु बड़ी संख्या में पलायन कर रहे हैं। आज दोस्त बढ़ती आबादी, घटती उपजाऊ कृषि भूमि , कम होते रोजगार तथा निवेश एवं बाजार के जोखिमो  ने कृषि क्षेत्र में कार्यरत युवाओं के समक्ष कृषि को लाभकारी बनाने में कहीं ना कहीं बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। अगर सरकार अपनी उदासीनता वाली भावना को त्याग कर युवाओं को प्रेरित करें तो कृषि  में कौशल विकास इन चुनौतियों का उचित समाधान बन सकता है किंतु वर्तमान परिप्रेक्ष्य में कृषि क्षेत्र में युवाओं का कौशल विकास अपने आप में एक बड़ी चुनौती है।
130 करोड़ की जनसंख्या वाले देश में दोस्त 70.7 प्रतिशत लोग आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं तथा 57.8 प्रतिशत लोग आजीविका हेतु कृषि से ही जुड़े हुए हैं। लेकिन देख रहे हैं धीरे-धीरे की कृषि में कार्यरत लोगों की संख्या गिरती जा रही है। अगर आंकड़े देखें तो 1999 से लगातार प्रतिदिन 2000 किसान कृषि का त्याग कर रहे हैं तथा हमारे देश के आधे से ज्यादा किसान कृषि को त्याग कर मजदूर बन गए हैं। आप ही देखो ना आज देश के कुल कार्यबल में निरंतर वृद्धि हुई लेकिन ध्यान से देखें तो कृषि का कुल कार्यबल में योगदान लगातार घटता चला जा रहा है। ऐसे में आप सोचो जब हमारे अन्नदाता ही  नहीं होंगे तब हम सब खाएंगे क्या?
याद रखना किसी भी देश के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए कौशल और ज्ञान दो प्रबल होते हैं। वर्तमान परिदृश्य माहौल में देखे तो उभरती अर्थव्यवस्था की मुख्य चुनौती से निपटने में वे देश आगे हैं जिन्होंने आज कौशल का उच्च स्तर प्राप्त कर लिया है । आज देखे तो भारत की जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा उत्पादक आयु समूह में है क्योंकि भारत के पास 60.5 करोड़ लोग 25 वर्ष से कम आयु के हैं। दोस्तों यही भारत के लिए सुनहरा अवसर प्रदान करेगा अगर देश के नीति निर्माताओं ने युवाओं को कौशल विकास में आगे बढ़ने के लिए मदद करें तो, परंतु हम देख रहे हैं यह आज एक बड़ी चुनौती है। हमारी अर्थव्यवस्था को दोस्त इस युवा वर्ग का लाभ तभी मिलेगा जब हमारा जनसंख्या विशेषकर युवा स्वास्थ्य ,शिक्षित और कुशल होंगे। आंकड़ों के मुताबिक तो हम देख रहे हैं कि कृषि क्षेत्र में कार्यरत कार्यबल वर्ष 2022 में 33 प्रतिशत  तक घटकर मात्र 19 को रह जाएगा वही आंकड़ों के मुताबिक दूसरी तरफ कुल कार्यबल का मात्र 18.5 प्रतिशत ही कृषि में औपचारिक रूप से कुशलता प्राप्त करेगा।
दोस्तों आज किसानों को बदहाली से खुशहाली की स्थिति में लाने की दिशा में हमें सभी संभव प्रयास किए जाने की जरूरत है नहीं तो फिर भूखे मरना होगा। इसीलिए भारत सरकार की 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने की पहल एक महत्वपूर्ण एवं उपयुक्त कदम है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु हमें विकास कार्यक्रम , तकनीकी तथा नीतियों का कुशल समन्वय कृषि क्षेत्र में कौशल विकास पर ध्यान केंद्रित करना होगा। पिछले वर्ष ही राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय के सर्वेक्षण के अनुसार किसानों की औसत आय 6426 रुपए प्रतिमाह है और इस आय में भी किसान 3078 रुपए कृषि से, 2069 रुपए मजदूरी /पेंशन 765 रुपए पशुधन व 514 रुपए गैर कृषि कार्यों से अर्जित करता है । आज भी सीमांत और छोटे किसान फसल उत्पादन में तेजी से तकनीकी विकास के साथ तालमेल रखने में असमर्थ हैं। अब आप ही सोच सकते हो कि 6426 रुपए  प्रति माह कमाने वाला किसान आखिर कैसे अपना और अपने परिवार का पालन करेगा। हमें किसानों के आय को दुगनी करने के साथ ही कौशल में भी उनको निपुण करना होगा, जिस प्रकार से हम देखते हैं कि किसानों के फलों सब्जियों और अनाजों का उचित मूल्य नहीं मिलता उस पर भी हमें विशेष तौर पर ध्यान देना होगा।
सबसे जरूरी चीज है इन सभी योजनाओं का क्रियान्वयन इमानदारी पूर्वक किया जाए।