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कोरोना का भय
October 8, 2020 • Brajesh Kumar Mourya • कविता
चारों ओर मचा है देखो कोरोना का रोना ,
नहीं समझ में आता इसका अंत कहां है होना ,
चीन में इसने जन्म लिया और पहुंचा जाके इटली ,
सारे देश बने हैं अब इसके हाथों की तितली ,
मुश्किल किया सभी का इसने अब तो जगना सोना ,
चारों और मचा है देखो कोरोना का रोना ,
नहीं ढूंढ पाया अब तक उपचार कोई भी इसका , 
कैसे काबू करें इसे है अक्स न दिखता जिसका ,
इसके सम्मुख लगता है अब मानव बिल्कुल बौना ,
चारों ओर मचा है देखो कोरोना का रोना ,
इसके भय से छुप कर बैठे आज सभी हैं घर में , 
जान बचानी है अपनी तो रहना इसके डर में ,
पता नहीं कब धावा बोले हमको समझ खिलौना ,
चारों ओर मचा है देखो कोरोना का रोना