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किसी ऐप का प्रयोग लड़कियों के अपमान करने की इजाजत देता है
May 29, 2020 • Brajesh Kumar Mourya • लेख
कुछ समय से आप एक ऐप टिक टॉक की भरपूर बुराइयां सुन रहे होंगे एक ऐप जिसे भारत देश के बहुत सारे लोगों द्वारा इस्तेमाल किया जा रहा है और जिस ऐप को सबसे अधिक भारतीयों द्वारा ही प्रयोग किया जा रहा है। भारत में टिक टॉक को सबसे अधिक लोगों ने इंस्टॉल करा है और सबसे अधिक लोग भारत में इसको पसंद कर रहे हैं। टिक टॉक का सबसे अधिक व्यापार भारत से ही हो रहा है।
किंतु कुछ समय से टिक टॉक का विरोध होने लगा है जिसमें भारतीयों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया है। चाइनीस कंपनी द्वारा बनाया गया है। भारतीयों को आज के समय में प्रयोग करने में शर्म आने लगी है और इस ऐप को प्रयोग करने वालों को वह देशद्रोही कहने से भी नहीं हिचकते हैं। एक ऐप से इतनी नफरत केवल इसलिए क्योंकि वहां उस देश में बना है। जिस देश को आप इस समय अपना दुश्मन समझ रहे हैं। गलत है या सही यह विचार इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी जरूरत क्या है। आप की अधिक जरूरत एक ऐप हैं तब वह चाहे किसी भी देश से जुड़ा हो आपको उससे फर्क नहीं पड़ेगा। किंतु यदि वह आपकी जरूरत नहीं है तब उसे निष्क्रिय करने के लिए आप किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार होंगे यह दिखाने के लिए कि हम देश के लिए क्या कर सकते हैं। 
 टिक टॉक का विरोध चाइना का एप्प होने की कारण यदि हो रहा है। तो हमें उन सभी वस्तुओं का भी विरोध करना चाहिए। जो चाइना में बनती है और हम इस्तेमाल करते हैं। फिर चाहे वहां हमारा हजारों रुपयों का खरीदा हुआ फोन क्यों ना हो। यदि हम अपनी महंगी से महंगी चीज को भी छोड़ दे केवल इसलिए क्योंकि वह हमारे विरोधी देश से आई है। तब आप किसी को समझा सकते हैैं उसके द्वारा प्रयोग की जाने वाली वस्तु का बहिष्कार करने के लिए। किंतु आप किसी को भी देशद्रोही कहकर इस प्रकार का कार्य करने के लिए मजबूर नहीं कर सकते। 
टिक टॉक का प्रयोग की जाने वाली लड़कियों को अपशब्द कहना। साथ ही उनको और उनके परिवार वालों को लगता टिप्पणियां देना आज कल एक आम बात हो गई है। प्रत्येक सोशल वेबसाइट पर आपको ऐसे पोस्ट देखने के लिए मिल जाएंगे, जहां पर टिक टॉक का प्रयोग की जाने वाली लड़कियों को ग़लत शब्द कहें जा रहें होंगे। टिक टॉक पर दिखाए जाने वाले वीडियो को गंदगी से भरा हुआ कहा जाने लगा है। 
टिक टॉक प्रयोग की जाने वाली भारतीय लड़कियों को आज बहुत अधिक गंदे विचारों को सुनने का अवसर प्राप्त हो रहा है। प्रत्येक सोशल वेबसाइट पर उनकी तस्वीरों का प्रयोग कर उनको वेशया कहें जाने के साथ ही, बलात्कार करने के लिए उकसाने का जिम्मेदार तक बता दिया गया है। ऐसे ग्रुप और प्रोफाइल आपको प्रत्येक सोशल वेबसाइट पर मिल जाएंगे। जहां पर टिक टॉक प्रयोग की जाने वाली लड़कियों के लिए गलत विचार ऐसे लिखें हुए हैं, जैसे इससे ही देश में क्रांति आएगी।
लड़कियों के लिए ऐसे विचार प्रकट करने वाले व्यक्तियों को हम कैसे सभ्य नागरिक मान सकते हैं। ऐसे विचार प्रकट करने वाले व्यक्ति चाहे कितने भी पढ़े लिखे हो, अनपढ़ हो, गरीब या फिर अमीर, सही तो दूर ऐसे लोगों को हम उचित भी नहीं समझ सकते हैं। 
एक ऐप से नफरत के चलते यदि हम इस कदर गिर जाएंगे की अपने ही देश की आधी आबादी को सब के सामने अपमानित करेंगे। इससे बड़ी शर्म की बात हमारे देश के लिए कोई और नहीं हो सकती। जहां स्त्रियों का सम्मान ही नहीं वहां फिर कैसे कोई विचारधारा सही हो सकतें है। 
एक लड़की यदि अपनी इच्छा अनुसार कोई वस्त्र पहनती है, या अपनी इच्छा अनुसार अपने विचारों को अपने तरीके से प्रकट करें। वह गलत है यह बताने वाले हम कौन होते हैं। क्या हमारे पास यह अधिकार है। कि हम किसी का भी अपमान बिना सोचे समझे कहीं भी कर सकते हैं। 
इस देश की लड़कियों की परवाह है तो अपने विचारों को बदली है उन्हें उनके अनुसार जीने का हक देना आपकी जिम्मेदारी है यह समझिए। वह आपकी बहन बेटी मां नहीं है किंतु एक लड़की है। इस देश की आधी आबादी है। इस देश के नागरिक होने के कारण उनके पास भी वही हक है जो आपके पास है। वह भी अपने विचार प्रकट कर सकती हैं। अपने अनुसार जीवन जी सकती है। बिना किसी को नुक्सान पहुंचाएं। लड़कियों के कपड़ों पर या विचारों पर अपनी दकियानूसी सोच का बोझ डालना गलत है। यदि आप उनके विचारों और वस्त्रों से परेशान हैं तो यह आप की समस्या है। इसका हल उनके वस्त्रों और विचारों में नहीं, आप के विचारों में है। अपनी पुरानी परंपराओं की सोच से बाहर आकर, इंसान को इंसान समझिए। 
            राखी सरोज