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जैविक और प्राकृतिक कृषि में सुनहरा भविष्य 
October 3, 2020 • Brajesh Kumar Mourya • लेख
देश की 70 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है, वहीं यह सेक्टर 50 फीसद से ज्यादा आबादी को रोजगार भी उपलब्ध कराता है। इसके अलावा हाल के वर्षों में जिस तरह से कृषि क्षेत्र में आधुनिकीकरण हुआ है, इसमें नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बढ़ा है। पारंपरिक खेती के साथ-साथ आर्गेनिक और इनोवेटिव फार्मिंग हो रही है, उसने एग्रीकल्चर के प्रति समाज और खासकर युवाओं का नजरिया काफी हद तक बदला है। यही कारण है कि बीते कुछ समय में आईआईटी और आईआईएम से पास आउट कई युवाओं ने मल्टीनेशनल कंपनियों का जॉब छोड़कर एग्रीकल्चर और एग्रीबिज़नस की ओर रुख किया है।
 
जैविक खेती का जिक्र तो आजकल बहुत हो रहा है, लेकिन सवाल यह है कि किसी को इसमें करियर बनाना है, तो वह क्या करे। गौरतलब है कि यह ऐसी खेती है, जिसमें सिंथेटिक खाद, कीटनाशक आदि जैसी चीजों के बजाय तमाम आर्गेनिक चीजें जैसे गोबर, वर्मी कम्पोस्ट, बायो फर्टिलाइजरस, क्रॉप रोटेशन तकनीक आदि का इस्तेमाल किया जाता है। कम जमीन में कम लागत में इस तरीके से पारंपरिक खेती के मुकाबले कहीं ज्यादा उत्पादन होता है। यह तरीका फसलों में जरुरी पोषक तत्वों को संरक्षित रखता है और नुकसानदेह केमिकल्स से दूर रखता है। साथ ही यह पानी भी बचाता है और जमीन को लम्बे समय तक उपजाऊ बनाये रखता है। यह पर्यावरण संतुलन बनाये रखने में मददगार है।
 
कृषि वैज्ञानिक आपकी जमीन की जांच करेंगे और यह तय करेंगे कि इसकी मिट्टी किस तरह की फसल के लिए अच्छी है। इसके बाद आपका प्रोजेक्ट कृषि विभाग में पास होने के लिए भेज दिया जायेगा। आर्गेनिक फार्मिंग के लिए तकरीबन हर राज्य में सरकार 80 से 90 फीसद तक सब्सिडी देती है। आज के समय में जो भी कंपनी किसानों के साथ बिज़नस ट्रांजेक्शन कर रही हैं, फिर चाहे वह खाद्यान्न, फल, फूल से जुड़ा हो या किसी सर्विस से, उसे एग्रीबिजनेस सेक्टर में शामिल किया जाता है। इसी तरह बीज, कीटनाशक, एग्रीकल्चर इक्विपमेंट की सप्लाई, एग्री-कंसल्टेंसी, एग्रो-प्रोडक्ट की स्टॉकिंग, फसल का बीमा कराने या खेती के लिए लोन देने का काम भी एग्रीबिजनेस के अंतर्गत आता है। एग्री-प्रोडक्शन में इन्वेस्टमेंट से लेकर उसकी मार्केटिंग तक का काम एग्री-बिज़नस कहलाता है।
 
भारत का एग्रीकल्चर सेक्टर आज सिर्फ अनाजों के उत्पादन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसमें बिज़नस के अवसर भी काफी बढ़ चुके हैं। फसलों की हार्वेस्टिंग से लेकर प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, स्टोरेज और ट्रांसपोर्टेशन में काम करने के लिए कई सारे मौके पैदा हुए हैं। इसके अलावा एडवांस टेक्नोलॉजी के आने से फ़ूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री और फ़ूड रिटेल सेक्टर में अनेक प्रकार के रोजगार सृजित हुए हैं, उन्हें मल्टीनेशनल कंपनियों में अच्छे पे-पैकेज पर रखा जा रहा है। इसके अलावा, एग्रीकल्चर और इससे जुड़े फील्ड के क्वालिफाइड यूथ के लिए वेयरहाउस, फ़र्टिलाइज़र, पेस्टिसाइड्स, सीड और रिटेल कंपनी में तमाम तरह के विकल्प सामने आ चुके हैं।
 
कृषि अब पूरी तरह से मानसून पर निर्भर नहीं है। वैज्ञानिक तरीके से अगर खेती की जाये, तो फसल भी अच्छी होती है और पानी भी कम लगता है। पहले जैसे सूखे के हालात अब नहीं पैदा होते। अब बारिश के पानी का स्टोरेज भी बेहतर तरीके से किया जाता है। इससे बारिश कम होने पर भी फसलों को पर्याप्त पानी मिल जाता है।
 
प्रफुल्ल सिंह "बेचैन कलम"
शोध प्रशिक्षक एवं साहित्यकार