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गंगा दशहरा पर फेसबुक लाइव कार्यक्रम 
June 2, 2020 • Brajesh Kumar Mourya • बिहार

नीतू नवगीत ने प्रस्तुत किए गंगा-गीत, झूमे श्रोता
 चलेली गंगोत्री से गंगा मैया जग के करे उद्धार,
पटना, (बिहार ब्यूरो) । भारत के विशाल सांस्कृतिक चेतना की वाहक नदी गंगा है । हिमालय पर्वत से निकलकर बंगाल की खाड़ी में मिलन से पूर्व करीम 2525 किलोमीटर का सफर तय करने वाली गंगा नदी का वास हर भारतवासी के दिल में है और इसीलिए इस नदी को हम सब ने मां का दर्जा दिया है । गंगा दशहरा के अवसर पर फेसबुक लाइव कार्यक्रम में गंगा नदी से जुड़े गीतों की प्रस्तुति करते हुए लोक गायिका डॉ नीतू कुमारी नवगीत ने कहा कि गंगा नदी मोक्षदायिनी, पापनाशिनी, पुण्यसलिला और सरित्श्रेष्ठा हैं । रघुकुल वंशी भागीरथ के प्रयास से देव नदी गंगा का धरती पर अवतरण मानव मात्र के कल्याण के लिए हुआ था । महाराज सगर के 60 हजार शापित पुत्रों की भटकती आत्माओं की मुक्ति के लिए गंगा माता अवतरित हुईं और फिर जगत कल्याण के लिए धरती पर ही रह गईं । नीतू कुमारी नवगीत ने इस अवसर पर चलेली गंगोत्री से गंगा मैया जग के करे उद्धार, शिव की जटा से निकली पावन जटाशंकरी मैया हे गंगा मैया, दुधवा अइसन जलधार बा, हे गंगा मैया तोहरे महिमा अपार बा, गंगा जी के पनिया हिलोर मारेला, मांगी ला हम वरदान ए गंगा मैया मांगी ला हम वरदान सहित अनेक लोक गीतों की मनभावन प्रस्तुति करके लोगों के मन को मोह लिया । लाइव कार्यक्रम में नीतू नवगीत ने  कहा कि गंगाजल अमृत के समान है । पूजा और त्यौहार के द्वारा ने जो पंचामृत बनाया जाता है उसमें एक अमृत गंगाजल भी है । हिमालय पर्वत में गंगा नदी की मुख्यधारा का प्रारंभ गोमुख मैं गंगोत्री ग्लेशियर से होता है और फिर धौलीगंगा, मंदाकिनी, कर्ण गंगा और अलकनंदा किशन जी खुदारा इसमें मिलती है इसीलिए गंगा नदी को पंच प्रयाग नदी भी कहा गया है । गंगा नदी को ब्रह्मा, विष्णु और महेश सहित सभी देवों का का आशीर्वाद प्राप्त है । मान्यता है कि भगवान विष्णु के पसीने की बूंद से गंगा बनी और फिर भगवान ब्रह्मा के कमंडल में रही । धरती पर बहने से पहले शिवजी की जटा में गंगा नदी का निवास हुआ और इस तरह वह त्रिदेव की प्रतिनिधि बन गईं ।