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दोष भला किसको दोगे
May 24, 2020 • Brajesh Kumar Mourya • कविता
अपने पैर कुल्हाड़ी मारौ,दोष भला किसको दोगे।
पेड़ काट बन-बाग उजारौ,दोष भला किसको दोगे।
 
समय कुल्हाड़ी काट रही है,एक-एक दिन जीवन के
समय कीमती व्यर्थ निकारौ,दोष भला किसको दोगे।
 
सुस्त,आलसी,कामचोर औ',निपट निठल्ले बन बैठे
अपनी किस्मत आप बिगारौ,दोष भला किसको दोगे।
 
नदियाँ,पर्वत करे प्रदूषित,जंगल काटे मनमाने 
बने बनाये काम मिटारौ,दोष भला किसको दोगे।
 
बृक्षारोपण,जल संरक्षण,वायु प्रदूषण दूर करो
फिर से बिगड़े काम सँवारौ,दोष भला किसको दोगे।