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June 8, 2020 • Brajesh Kumar Mourya • कविता

आज दुनिया देखिए जहान देखिए

प्रत्यक्ष स्वार्थसिद्धी का प्रमाण देखिए
रिश्तों का नातो का कोई न मोल रहा अब
मतलब में डूबा हर कोई इंसान देखिए
 
बात औरों की किसी को भाती ही नहीं 
ज्यादा खुद की बात से कुछ आती ही नहीं 
हल्के हुए अपनत्व के प्रभाव वो सभी 
भावनाओं में भी पहले से न भाव वो सभी
संवेदनाएं सुप्त सी हो गई जमाने में
छोटे दिल बड़े - बड़े मकान देखिए
 
अपने दंभ में यहां पे फूले हैं सभी
बाप मां के त्याग को अब भूले हैं सभी
आबाद बेटे बाप मां आबाद नहीं हैं
उनकी जरूरतें किसी को याद नहीं है
बुजुर्ग जिनके हाल पे आंसू बहा रहे
वो दे रहे नेताओं को सम्मान देखिए
 
पहरा भी है हर एक धरम पर यहां साहब
है जालसाजियां अब चरम पर यहां साहब
चेहरे जमाखोरों के खिलते ही जा रहे
माटी के लाल माटी में मिलते ही जा रहे
अरबों का खेल भूखा पर किसान देखिए
 
विक्रम कुमार
मनोरा, वैशाली