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बेटी
June 26, 2020 • Brajesh Kumar Mourya • कविता
ले जन्म अगर बेटी घर में
समझो वरदान मिला तुमको
लक्ष्मी खुद घर में आई है
ईश्वर ने धन्य किया तुमको
जिस घर में नहीं कोई बेटी
वह घर सूना सा लगता है
खनखन करती सी मधुर हंसी
सुनने को हृदय तरसता है
बेटी भी अपनी होती है
क्या हुआ अगर ससुराल गई
जिस घर में भी वो जाती है
देती है सबको खुशी नई
ना भेद करो उनमें कुछ भी
संतान जो तुमने पाई है
बेटा क्यों लगता है अपना
बेटी क्यों लगे पराई है
 
रंजना मिश्रा ©️