ALL उत्तर प्रदेश बिहार मध्य प्रदेश लेख कहानी कविता अन्य खबरें न्युज दशहरा व दिवाली विशेष
बाइडेन के अमेरिका का राष्ट्रपति बनने पर भारत पर क्या असर होगा?
November 8, 2020 • Brajesh Kumar Mourya • लेख
 साथियों  बाइडेन ने अमेरिका का राष्‍ट्रपति चुनाव जीत लिए है ,ये  उम्रदराज अमेरिकी राष्ट्रपति बनने तक का शानदार सफर तय करके शनिवार को इतिहास रच दिए हैं।  जैसा कि हम सभी जानते हैं कि  ट्रंप को हराकर बाइडेन अमेरिका के 46वें राष्ट्रपति बन गए हैं। आपको बता दें कि  77 साल 11 महीने के  बाइडेन लंबे समय से ही राजनीति कर रहे हैं जो कि ओबामा  सरकार के दौरान बाइडेन ही उपराष्ट्रपति थे. मतलब  दोस्त बाइडेन राजनीति के पुराने खिलाड़ी हैं।
अमेरिका राजनीति में करीब पांच दशकों से सक्रिय जो बाइडेन ने सबसे युवा सीनेटर से लेकर सबसे उम्रदराज अमेरिकी राष्ट्रपति बनने तक का शानदार सफर तय करके इतिहास रच दिए हैं। आपको बता दें कि 77 वर्षीय बाइडेन छह बार सीनेटर रहे और अब अमेरिका के निवर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को हराकर देश के राष्ट्रपति बन रहे हैं. ऐसा नहीं है कि यह कामयाबी उन्होंने अपने पहले प्रयास में पा लिया  है. बाइडेन को वर्ष 1988 और 2008 में राष्ट्रपति पद की दौड में नाकामी  भी मिली थी ।
साथियों बाइडेन  को  अमेरिका के राष्ट्रपति बनने से  पूरी दुनिया का नजर कहीं ना कहीं भारत की तरफ भी है , मुझे लगता है कि भारत अमेरिका रक्षा संबंध की बात किया जाए तो बड़े बदलाव की संभावना नजर अभी तो नहीं आ रहा है, जैसे पहले संयुक्त युद्धअभ्यास और सैन्य समझौते होते रहे हैं उसी तरह आगे भी होंगे। लेकिन सबसे बड़ा बदलाव भारत और अमेरिका के आर्थिक संबंध और बेहतर होने की उम्मीदें हैं जिससे कि दोनों देशों के बीच और अधिक कारोबार बढ़ सकता है ।इन सभी में सबसे अच्छी बात मुझे यह लग रही है कि अब हम भारतीयों को अमेरिका के राष्ट्रपति बाइडेन के निर्वाचित हो जाने से ज्यादा ग्रीन कार्ड मिल पाएगा यानी ज्यादा भारतीय अमेरिका में बस सकते हैं। इसके साथ ही साथियों आईटी सेक्टर की कंपनियों को बाइडेन के आने का फायदा जरूर होगा।
साथियों जैसा कि हम जानते हैं कि राष्ट्रपति बनने का सपना संजोये डेलावेयर से आने वाले दिग्गज नेता बाइडेन को सबसे बडी सफलता उस समय मिली जब वह दक्षिण कैरोलीना की डेमोक्रेटिक पार्टी प्राइमरी में 29 फरवरी को अपने सभी प्रतिद्वंद्वी को पछाडकर राष्ट्रपति पद की दौड में जगह बनाने में कामयाब रहे. वाशिंगटन में पांच दशक गुजारने वाले बाइडेन अमेरिकी जनता के लिए एक जाना-पहचाना चेहरा थे क्योंकि वह दो बार तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में उप राष्ट्रपति रहे है।
 74 वर्षीय ट्रंप को हराकर व्हाइट हाउस में जगह पाने वाले बाइडेन अमेरिकी इतिहास में अब तक के सबसे अधिक उम्र के राष्ट्रपति बन गए हैं. डेलावेयर राज्य में लगभग तीन दशकों तक सीनेटर रहने और ओबामा शासन के दौरान आठ वर्षों के अपने कार्यकाल में वह हमेशा ही भारत-अमेरिकी संबंधों को मजबूत करने के हिमायती रहे. बाइडेन ने भारत-अमेरिका परमाणु समझौते के पारित होने में भी अहम भूमिका निभायी थी.भारतीय राजनेताओं से मजबूत संबंध रखने वाले बाइडेन के दायरे में काफी संख्या में भारतीय-अमेरिकी भी हैं. चुनाव के लिए कोष जुटाने के एक अभियान के दौरान जुलाई में बाइडेन ने कहा था कि भारत-अमेरिका 'प्राकृतिक साझेदार' हैं। 
 उन्होंने बतौर उप राष्ट्रपति अपने आठ साल के कार्यकाल को याद करते हुए भारत से संबंधों को और मजबूत किए जाने का जिक्र भी किए थे और यह भी कहे थे कि अगर वह राष्ट्रपति चुने जाते हैं तो भारत-अमेरिका के बीच रिश्ते उनकी प्राथमिकता रहेगी. पेनसिल्वेनिया में वर्ष 1942 में जन्मे जो रॉबिनेट बाइडेन जूनियर ने डेलावेयर विश्वविद्यालय में शिक्षा प्राप्त की और बाद में वर्ष 1968 में कानून की डिग्री हासिल की. बाइडेन डेलावेयर में सबसे पहले 1972 में सीनेटर चुने गए और उन्होंने छह बार इस पद पर कब्जा जमाया. 29 वर्ष की आयु में सीनेटर बनने वाले बाइडेन अब तक सबसे कम उम्र में सीनेटर बनने वाले नेता हैं।
आपको बता दें की मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब तक हार नहीं मानी है। बाइडेन की जीत की घोषणा पर करीब 5 घंटे चुप्पी साधे रहने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने ट्वीट किए और खुद के जीतने का दावा किए है। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। ट्रंप ने ट्वीट किया कि पर्यवेक्षकों को काउंटिंग रूम में घुसने की इजाजत नहीं दी गई। यह चुनाव मैं ही जीता हूं और मुझे 7 करोड़ 10 लाख वैध वोट मिले हैं। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान कई गलत चीजें हुई हैं, जिन्हें पर्यवेक्षकों को नहीं देखने दिया गया। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ।
वैसे दोस्त डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका का राष्ट्रपति चुनाव हारने के बाद भी 128 साल पुराना रेकॉर्ड तोड़कर विदाई ले रहे हैं। वे अमेरिका के ऐसे राष्ट्रपति हैं जिन्हें जनता ने लगातार दूसरी बार पॉपुलर वोट में हरा दिया है। ट्रंप से पहले बैंजामिन हैरिसन के साथ भी ऐसा वाकया हो चुका है। रिपब्लिकन पार्टी के प्रत्याशी बेंजामिन 1888 में हुए चुनाव के दौरान पॉपुलर वोट में हारने के बावजूद अमेरिका के राष्ट्रपति चुने गए थे। उन्होंने 1892 का राष्ट्रपति चुनाव भी लड़ा, लेकिन पॉपुलर वोट में ग्रोवर क्लेवलेंड के हाथों हार का सामना करना पड़ा।   अब आगे  देखते हैं कि अमेरिका में बाइडेन के राष्ट्रपति बन जाने से भारत के रिश्ते में कितना मजबूती और परिवर्तन आती है।