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असफ़लता
June 1, 2020 • Brajesh Kumar Mourya • लेख

असफल होना कोई बड़ी बात नही है,एक दिन मैंने फेसबुक पर एक खबर पढ़ी थी जिसमे सन 2007 में वो सड़क पर अकेले बैठ के गिटार बजाते थे।और जैसे ही सफल हुए एक बार में लाखों लोग उनकी प्रस्तुति पर तालियाँ बजाते हैं।ऐसे बहुत सारे उदाहरण इस जगत में हैं।अब्राहम लिंकन जो अमेरिका के 16वें राष्ट्रपति थे।जो राष्ट्रपति बनने से पहले कई बार चुनाव में पराजित हुए थे तब जाकर कही उन्हें सफलता नसीब हुई। थॉमस अल्वा एडिसन जो कि बहुत ही महान वैज्ञानिक थे।उनका किसी बैठक में बहुत मजाक बनाया गया था।एक बार एक व्यक्ति ने पूछा असफलता से दुख नहीं होता उसने पूछा आपने करीब एक हजार प्रयोग किए, लेकिन आपके सारे प्रयोग असफल रहे। साथ ही, आपकी मेहनत बेकार हो गई। क्या आपको दुःख नहीं होता है?
एडिसन ने कहा मैं सोचता हूं कि मेरे एक हजार प्रयोग असफल हुए है। मेरी मेहनत बेकार नहीं गई, क्योंकि मैंने एक हजार प्रयोग करके यह पता लगाया है कि इन एक हजार तरीकों से बल्ब नहीं बनाया जा सकता। मेरा हर प्रयोग, बल्ब बनाने की प्रक्रिया का हिस्सा है और मैं अपनी हर कोशिश के साथ एक कदम आगे बढ़ता हूं।और इस घटना के कुछ दिनों बाद ही उन्होंने वो कारनामा कर के दिखाया जिसकी किसी ने कल्पना तक नही की थी।एक हजार बार असफल होने के बाद भी उन्होंने धैर्य नही छोड़ा।इस कहानी से हम बहुत कुछ सीख सकते हैं।दुनिया के सबसे अमीर इंसान बनने से पहले बिल गेट्स ने हावर्ड कॉलेज में बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी थी। इसके बाद उन्होंने अपना पहला बिज़नेस शुरू किया जो बुरी तरह असफल साबित हुआ।
                        दुनिया में जीनियस के तौर पर पहचाने जाने वाले वैज्ञानिक आइंस्टीन चार साल तक बोल और सात साल की उम्र तक पढ़ नहीं पाते थे। इस कारण उनके मां-बाप और शिक्षक उन्होंने एक सुस्त और गैर-सामाजिक छात्र के तौर पर देखते थे. इसके बाद उन्हें स्कूल से निकाल दिया गया और ज़्यूरिच पॉलिटेक्निक में दाखिला देने से इंकार कर दिया गया।इन सब के बावजूद वे भौतिक विज्ञान की दुनिया में सबसे बड़ा नाम साबित हुए।

नोबल पुरस्कार जीतने वाले और दो बार ब्रिटेन के प्रधानमंत्री चुने गए विंस्टन चर्चिल की भी कहानी संघर्ष से भरी है। स्कूली शिक्षा के दौरान चर्चिल 6वीं क्लास में फेल हुए।इसके बाद प्रधानमंत्री बनने से पहले अपने हर चुनाव में वो फेल हुए लेकिन उन्होंने मेहनत करना नहीं छोड़ा।इतनी कहानियों से हम बहुत कुछ सीख सकते हैं, और निश्चित ही धैर्य के साथ काम लेते हुए एक दिन अवश्य सफल हो सकते हैं।

         रुपेश कुमार श्रीवास्तव "रजत"
               सलेमपुर (देवरिया)