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अम्फान का वैज्ञानिक विश्लेषण 
May 26, 2020 • Brajesh Kumar Mourya • लेख
किसी भी तूफान की श्रेणी हवा की गति के आधार पर तय होती है तूफान की श्रेणी हवा की गति बढ़ने के साथ ही १-५ स्केल पर चली जाती है। जब हवा की गति ६३ किमी./घंटे के रफ्तार पर हो तो उसे 'ट्रॉपिकल तूफान' कहा जाता है तथा जब हवा की गति ११९ किमी./घंटे की रफ्तार या उससे अधिक हो तो उसे 'ट्रॉपिकल साइक्लोन' कहा जाता है परंतु जब चक्रवात की गति ६२-८८ किमी./घंटा हो और तूफान की रफ्तार २२१ किमी./घंटा या उससे अधिक हो तो उसे "सुपर साइक्लोन" कहा जाता है। 
किसी भी चक्रवात के उत्पन्न होने की संभावना तब होती है जब समुद्र के जल का तापमान २७ डिग्री सेल्सियस के ऊपर चला जाए जिससे तीव्र गति से जल वाष्प में बदलकर ऊपर उठने लगती है यही ऊपर उठती हुई गर्म हवा नमी से मिलकर बादल का निर्माण करती है जिससे वहाँ निम्न वायुदाब का क्षेत्र विकसित हो जाता है और खाली जगह को भरने के लिए ठंडी वायु तीव्र गति से आगे बढ़ने लगती है। यही गर्म व ठंडी हवा का कर्तन बादलों में तेजी से घुमाव पैदा करता है जिससे तूफान का जन्म होता है। 
इन्हीं क्रियाओं का प्रतिफल यह अम्फान तूफान भी है जो १८ मई को दीघा तट पर उत्पन्न हुआ और देखते ही देखते एक भीषण उष्णकटिबंधीय चक्रवात का रूप ले लिया और १९ मई को उसने उत्तर व उत्तर पूर्वी तटीय राज्यों पर जा पहुंचा और २० मई को उसका भयानक रूप ऊँची लहरों की दीवार संग पश्चिम बंगाल, कोलकाता, उड़ीसा आदि अनेकों राज्यों में प्रवेश कर तबाही मचाने लगा है। जिससे भारी मात्रा में जान-माल का नुकसान हुआ। 
अन्ततः यह कहा जा कि प्रकृति के साथ मानव जाति की यह छेड़छाड़ ने किसी न किसी रूप में जलवायु को प्रभावित किया है जिससे जलवायु परिवर्तन व असंतुलन की स्थिति का जन्म हुआ और प्रकृति ने उस असंतुलन को मिटाने हेतु नये-नये हथकंडे अपनाना शुरू कर दिया है हमें सचेत होना होगा प्रकृति और मानव के मित्रवत सम्बन्धों के प्रति तभी ये आपदाओं को रोका जा सकता है।