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 पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व में जैव विविधता संरक्षण की भूमिका
May 21, 2020 • Brajesh Kumar Mourya • लेख

(22 मई अन्तरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस विशेष)
जैसा कि हम सब जानते हैं कि "विश्व जैव विविधता दिवस" प्रतिवर्ष 22 मई को मनाया जाने वाला एक अन्तरराष्ट्रीय पर्व है। जिसकी शुरुआत संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा की गई एक कानूनी प्रतिबद्धता है जिसका उद्देश्य पृथ्वी के समस्त पारिस्थितिकी तंत्र को संरक्षित करने से है। जैव विविधता का सामान्य अर्थ यह है कि पृथ्वी पर मौजूद जीव-जंतुओं और वनस्पतियों की वह समस्त प्रजातियां जिन्होंने पृथ्वी पर जीवन की आधारशिला रखी। यह प्रकृति का एक ऐसा अनिवार्य घटक है जिसने मानवीय जीवन के अस्तित्व में अपना सम्पूर्ण योगदान दिया है। जैव विविधता के बिना पृथ्वी पर जीवन की कल्पना महज मिथ्या मात्र है।
सर्वविदित है कि प्रत्येक जीव एक दूसरे की आपसी सेवाओं पर ही निर्भर है अतः एक संतुलित पारिस्थितिकी के द्वारा ही जीवन के अस्तित्व को बचाया जा सकता है। मगर आज के इस वैज्ञानिक युग ने जैव विविधता की परिभाषा को ही बदल कर रख दिया है। मानव अपनी आवश्यकता पूर्ति हेतु जैव विविधता के संतुलन को बिगाड़ता जा रहा है जिससे आज पृथ्वी की अनेक प्रजातियां या तो पूर्णतः विलुप्त हो चुकी हैं या फिर विलुप्तता के कगार पर खड़ी हैं।
जैव विविधता के एक मापन रिपोर्ट के अनुसार पृथ्वी पर लगभग  20 लाख जैव प्रजातियों का अस्तित्व मौजूद है जिनका पारिस्थितिकी तंत्र में अपना एक महत्वपूर्ण स्थान है। एक अनुमान के अनुसार पृथ्वी से प्रतिवर्ष लगभग 10000-20000 जैव प्रजातियां किसी न किसी कारण से विलुप्त हो रही हैं। हाल ही में जैव विविधता के इस गिरते स्तर को देखते हुए वैश्विक जैव विविधता फ्रेमवर्क (वर्ष 2020 के बाद) के शून्य मसौदे में जैव विविधता की गिरती स्थिति और इसको संरक्षित करने पर विशेष जोर दिया गया है।
इन मसौदों के बाद भी परिस्थितियां कुछ अलग हैं जैव विविधता वाले क्षेत्रों और पारिस्थितिकी तंत्रों में मानवीय हस्तक्षेप के कारण वर्तमान जैव विविधता में तेजी से गिरावट दर्ज की जा रही है। जिस तरह आज दिन-प्रतिदिन इस प्रकृति का कोई न कोई प्रजाति मानव जनित जलवायु परिवर्तन व क्षेत्र विशेष कारणों से विलुप्त हो रह है ऐसा कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा कि आने वाले कुछ ही वर्षों में जैव विविधता का लगभग तिहाई भाग या तो विलुप्त हो जाएगा या फिर विलुप्तता की कगार पहुंच जाएगा।
गौरतलब है कि एक संतुलित जैव विविधता का मानवीय जीवन के अस्तित्व को संतुलित और समृद्ध बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण महत्व है। प्रकृति की यही जैव विविधता मानव के सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों को सुचारू रूप से चलाने में सहयोगी होता है। मानव अपनी समस्त जरूरतों को पूरा करने के लिए पूर्णरूपेण प्राकृतिक जैव विविधता पर ही निर्भर है। इसी परिपेक्ष्य में ई. जिम्मरमैन ने कहा है कि "संसाधन होते नहीं बनाए जाते हैं" अर्थात मानव अपनी आवश्यकतानुरूप इसी जैव विविधता रूपी प्राकृतिक साधन को अपने विकास हेतु संसाधन के रूप में परिणति कर लेता है। जैव विविधता के इतने महत्वपूर्ण महत्व को अनदेखा कर आज का मानव इसका जिस अनुपात में अंधाधुंध उपयोग कर रहा है उसके सम्मुख इसका संरक्षण नगण्य मात्र का भी नहीं कर रहा। जिससे पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बिगड़ता जा रहा और इस असंतुलन के अनेकों विध्वंसक परिणाम मानव के सम्मुख आ कर खड़े हो गए हैं।
अतः आवश्यकता है कि हम जैव विविधता संरक्षण हेतु सर्वसम्मति से आगे आए ताकि जैव विविधता में तीव्र गति से बढ़ते इस असंतुलन को रोका जा सके। जैव विविधता संरक्षण भविष्य के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण पहल है क्योंकि प्राकृतिक जैव विविधता ही पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व का मार्ग प्रशस्त करते हैं। प्रकृति ने सम्पूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र की रचना एक दूसरे की निर्भरता स्वरूप की है। प्रकृति का कोई भी जीव-जंतु, वनस्पति आदि अर्थहीन नहीं है पृथ्वी पर मौजूद हर जीव-जंतु व वनस्पति किसी न किसी रूप में मानव की आवश्यकताओं की पूर्ति में भागीदार है। अतः अपनी आवश्यकताओं में भागीदारी निभाने वाले जैव विविधता संरक्षण हमारा मूल कर्तव्य है।

रचनाकार :- मिथलेश सिंह 'मिलिंद'