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 परिक्षा के लिए ऑनलाइन सिस्टम का प्रयोग क्यों अनुचित
May 23, 2020 • Brajesh Kumar Mourya • लेख
आनलाइन, आज यह शब्द हमारे जीवन का हिस्सा बन चुका है। हमारे सभी कार्य करने के लिए हम ऑनलाइन सिस्टम का प्रयोग करने की कोशिश कर रहे हैं। चाहे वह खरीदारी हो, या हमारे द्वारा किए जाने वाले अन्य कार्य। एक वायरस के डर और लड़ाई के बीच हमने ऑनलाइन सिस्टम को अपने जीवन का हिस्सा बना लिया है। हमारी शिक्षा प्रणाली में ऑनलाइन सिस्टम का प्रयोग हो रहा है। जिसके चलते हमारे स्कूल और कॉलेजों में ऑनलाइन क्लास ली जा रही है। जिसमें बहुत सी परेशानियों से हर रोज हमें जूझना पड़ रहा है। चाहे हम शिक्षक हो, छात्र हो या छात्र के माता-पिता। फिर भी हम शिक्षा को बनाए रखने के लिए प्रत्येक दिन कार्य कर रहे हैं।
किन्तु जब हम ऑनलाइन परीक्षा की बात करतें हैं। तब यह समझना जरूरी है, कि हम क्या करने की कोशिश कर रहे हैं। जहां हम सही तरीके से बच्चों को शिक्षा ऑनलाइन उपलब्ध करवा नहीं पा रहे हैं। वहां हम ऑनलाइन परीक्षा की बात कर रहे हैं। यह केवल एक सोच नहीं है। हमारे देश के एक बड़े विश्व विद्यालय द्वारा यह कार्य किया जाने वाला है। 
दिल्ली विश्वविद्यालय अप्रैल मई में होने वाली परीक्षा को इस बार ऑनलाइन लेने की घोषणा कर चुका है। जिसकी घोषणा अभी कुछ समय पहले ही की गई है और जून की शुरुआत से परीक्षा का आयोजन भी किया जाना है। इतने  कम समय में छात्रों द्वारा परीक्षा की तैयारी कर पाना एक बहुत बड़ा सवाल है। जब छात्र मार्च महीने से ही अपने घरों पर है और अधिकतर दूर दराज के इलाकों में रहने वाले छात्र हॉस्टल में ही अपनी सभी किताबें और पाठक समाग्री छोड़ कर चले गए हैं। तब वह कैसे अपनी परीक्षा की तैयारी करेंगे। 
साथ ही दूर गांवों और कस्बों में रहने वाले छात्र भी इस विश्व विद्यालय के छात्र है। ऐसे स्थानों पर इंटरनेट उपलब्ध ना होने के कारण, वह ऑनलाइन होने वाली क्लास को भी नहीं लें सकें, बहुत सारी परेशानियों से जूझ रहे हमारे यहां के गरीब और निम्न मध्यमवर्गीय लोगों के लिए इस प्रकार की परीक्षा उनकी मेहनत और लगन से कामयाबी पाने के बीच रोक उत्पन्न कर रही है। 
जिन बच्चों के पास पुस्तक और लेपटॉप-कंप्यूटर उपलब्ध नहीं है। वह पहले ही एक कदम परीक्षा के इस प्रकार के तरीके से पीछे  हो गए हैं।  हमें ऑनलाइन सिस्टम का सही तरीका ज्ञात ही ना हो। तब हम कैसे उस का प्रयोग कर के अपने जीवन की एक जरूरी परीक्षा देंगे। एक ऐसी परीक्षा जिसके द्वारा हमें आगे अपनी पढ़ाई ही नहीं करनी है, बल्कि इन परीक्षा से प्राप्त नंबरों की आवश्यकता आप को किसी अच्छी नौकरी को प्राप्त करने के लिए भी पड़ेगी। 
लेकिन जब हमारे देश में बड़े विश्व विद्यालय, बस अपनी खानापूर्ति करने के लिए। छात्राओं को होने वाली परेशानियों को बिना समझे। उन पर अपने द्वारा लिए जाने वाले, एक दफा फैसला थोप देना। एक बड़ा सवाल उठाता है कि हमारे देश में गरीब और मजबूर लोगों की आवाज सुनने वाला अब कोई भी नहीं है।  यह बहुत दुख की बात है कि जहां हम एक ओर सभी को इस देश का हिस्सा मानकर, सभी से उम्मीद रखते हैं। देश के लिए होने वाली परेशानियों को समझें और उन से निपटने में अपना सहयोग दे। दूसरी ओर जब कोई फैसला लेने की बात आती है। तब बस कुछ अमीरों को ध्यान में रख कर फैसले लेते हैं।
शिक्षा हम सभी का अधिकार होने के साथ ही, आने वाले देश के भविष्य कहें जाने वाले बच्चों की नींव रखने के लिए भी जरूरी है। लेकिन इस प्रकार से ली जाने वाली ऑनलाइन परीक्षा एक बहुत ही ग़लत फैसला है। हमारे विश्वविद्यालय अगर सभी छात्रों को ऑनलाइन व्यवस्था उपलब्ध नहीं करवा पा रहे हैं। तब वह ऐसी व्यवस्था का प्रयोग करके हम बच्चों की परीक्षा लेकर उनके आने वाले जीवन को मुश्किल नहीं बना सकते हैं। 
आज हम एक बड़ी समस्या से जूझ रहे हैं। इस समस्या के समय में हम सही फैसलों की आवश्यकता है। छात्रों को शिक्षा देना जरूरी है, इसलिए ऑनलाइन सिस्टम का प्रयोग करना ग़लत नहीं है। किन्तु ऑनलाइन परीक्षा लेना ग़लत है। 
हमें चाहिए कि शिक्षकों को कहें कि वह अभी तक की हुई परीक्षा और क्लास के आधार पर बच्चों को नम्बर दे। ताकि हम परीक्षा की खानापूर्ति करने के चक्कर में बच्चों के भविष्य को बरबादी की ओर ना ले जाएं। 
             राखी सरोज