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"" कोरोना काल में वैश्विक गरीबी का संकट बढ़ता जा रहा है ""
June 16, 2020 • Brajesh Kumar Mourya • लेख
हाल ही में एक शोध के मुताबिक कोरोना वायरस के कारण विश्व भर में 1 अरब से अधिक लोग अत्यधिक गरीब हो सकते हैं. यह सच है दोस्तों की भारत में भी इस वैश्विक महामारी से निपटने के लिए लॉकडाउन लगाया गया और सख्त पाबंदियां लगाई गई थी जिसके कारण बहुत से लोगों का काम -धंधा चौपट हो गया आपने भी देखा कि कैसे प्रवासी मजदूरों की हालात बदतर हुई l आज पूरे विश्व में वायरस फैल चुका है, जिसके कारण लाखों लोगों की मौत हो चुकी है l पिछले दिनों किंग्स कॉलेज लंदन और ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी के शोध में भी यह बताया गया था कि मध्यम आय वाले विकासशील देशों में गरीबी का स्तर नाटकीय रूप से बढ़ रहा है , इन देशों में गरीबी रेखा से ठीक ऊपर लाखों लोग रहते हैं l जैसे कि बांग्लादेश, इंडोनेशिया, भारत, पाकिस्तान और फिलीपींस में गरीबी का खतरा बढ़ सकता है क्योंकि इस महामारी की वजह से लगाया गया लॉकडाउन के कारण आर्थिक गतिविधियों को गंभीर रूप से प्रभावित होते हुए हम देख रहे हैं l दोस्तों विकासशील देशों के लिए यह महामारी तेजी से आर्थिक संकट बनती जा रही है l देखे तो लाखों लोग गरीबी रेखा के बिल्कुल ऊपर रहते हैं, इनकी महामारी के कारण आर्थिक स्थिति अनिश्चित है जोकि सबसे खराब परिदृश्य में अत्यंत गरीबी में रहने वालों की संख्या 70 करोड़ से बढ़कर 1.1 अरब हो सकती है जो कि हमें बिना कार्यवाई के यह संकट वैश्विक गरीबी पर हुई प्रगति को 20 या 30 साल पीछे धकेल सकता है l
मेरा अनुरोध है कि विश्व के सभी नेता लोग तत्काल कदम उठाने का प्रयास करें नहीं तो सर्वे के मुताबिक 4.9 करोड़ लोग कोविड-19 और उसके प्रभाव के कारण अत्यधिक गरीबी का शिकार हो सकते हैं l
दोस्तों मूलभूत आवश्यकताओं की कमी किसी को नहीं होना चाहिए जैसे कि आश्रय, पर्याप्त भोजन, कपड़े, दवाइयां यह सब जीवन को जारी रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है और यह हमारे संविधान में लिखा भी गया है कि सभी को यह मूलभूत सुविधाएं जरूर मिलना चाहिए l
दोस्तों गरीबी एक अदृश्य समस्या ही है जो किसी व्यक्ति और उसके सामाजिक जीवन को कई तरह से बुरी तरह प्रभावित करता है l दोस्तों गरीबी को रोकी जा सकती है अगर व्यक्ति में इच्छाशक्ति हो और सरकार दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ भेदभावकारी कानून को तोड़े और सभी को बराबरी का अधिकार दे जैसा कि संविधान के अनुच्छेद 14 में लिखा गया है कि सभी बराबर हैं उसी प्रकार किसान के उपज का उचित मूल्य मिलना और मजदूरों के मजदूरी उचित मिलना हर वर्ग में समावेशी तरीके से विकास करने से ही गरीबी जैसी समस्या से निपट सकते है l 
ध्यान से देखें तो गरीबी व्यक्ति को स्वतंत्रता, मानसिक कल्याण, शारीरिक कल्याण और सुरक्षा की कमी बनाए रखती है l उचित शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य, पूर्ण साक्षरता, सभी के लिए घर, और साथ  ही सरल जीवन जीने के लिए अन्य आवश्यक चीजों को लाने के लिए देश और दुनिया से गरीबी को हटाने के लिए सभी को संयुक्त रूप से काम करने के लिए अब पहल करने की जरूरत है l दोस्तों हम देखते हैं कि अक्सर गरीब परिवार के बच्चों को उचित स्कूली शिक्षा भी नहीं मिलता ना ही उचित पोषण और खुशहाल बचपन का मौका मिलता ही नहीं है l हम कह सकते हैं कि अशिक्षा, भ्रष्टाचार, बढ़ती जनसंख्या, वैश्विक महामारी जैसे कि अभी कोरोना वायरस, खराब कृषि, और सबसे महत्वपूर्ण कारक मुझे लगता है l गरीबी  -अमीरों और गरीबों के बीच अंतर है , बता दें कि अपने ही भारत में जहां संविधान का अनुच्छेद 14 सभी को बराबरी की बात कहता है वहां पर पूरे देश के 90% संपत्ति पर 10% अमीरों का कब्जा है वही 10% संपत्ति पर 90% गरीब और मध्यम परिवार किसी प्रकार गुजारा बसर करता है तो हमारे यहां संसाधन तो बहुत है लेकिन इनमें भेदभाव बहुत ज्यादा है l 
अगर हम स्कूल से ही शुरुआत करें तो इस गरीबी के चक्र से हम बहुत जल्द निकल सकते हैं ,जैसे कि अगर किसी अफसर, मंत्री और गरीब मजदूर किसान के बच्चे सब एक ही साथ एक ही विद्यालय में पढ़ाई करेंगे तो आने वाले 15 से 20 वर्षों में देखना धीरे-धीरे भेदभाव खत्म हो जाएगा और बहुत हद तक गरीबी भी खत्म हो जाएगी l साथ ही भारत सरकार द्वारा सभी के लिए संयुक्त प्रयास करने की जरूरत है विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक शिक्षा पर और जनसंख्या नियंत्रण, परिवार कल्याण, रोजगार सृजन और जिले के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट और नेता जी के बच्चें भी उसी विद्यालय में पढ़ाई करेंगे जिसमें गरीब किसान मजदूर के बच्चे पढ़ते हैं फिर देखना भेदभाव खुद-ब-खुद एक दिन खत्म हो जाएगा l 
दुख के साथ कह रहा हूं कि छोटे-छोटे बच्चे गरीबों के किसी होटलों और किसी फैक्ट्रियों में काम करते हैं जिस उम्र में उनके हाथों में किताबें होनी चाहिए और उनको पर्याप्त भोजन भी नहीं मिलता जिसके कारण बहुत से घातक बीमारियां उन बच्चों को लग जाती है l 
हमें गरीबी को मिटाने के लिए सबसे पहले भेदभाव नीति को समाप्त करना होगा जैसा कि मैंने बोला सभी को समान शिक्षा मिले चाहे वह नेता जी का बेटा हो चाहे गरीब किसान का बच्चा हो और साथ ही किसानों को अच्छी कृषि के साथ-साथ उसे लाभकारी बनाने के लिए उचित और आवश्यक सुविधाएं सरकार को मुहैया कराना चाहिए , साथ ही बढ़ती जनसंख्या को कम करने के लिए लोगों को परिवार नियोजन का पालन करना चाहिए साथ ही गरीबी को समाप्त करने के लिए भ्रष्टाचार को हमेशा के लिए समाप्त करने की जरूरत है l 
गरीबी किसी एक व्यक्ति का समस्या आज नहीं है बल्कि यह आज अंतरराष्ट्रीय समस्या बन गया है, दोस्तों सतत और समावेशी विकास के लिए सरकार को पहल करने के साथ -साथ हर व्यक्ति को एकता के साथ प्रयास करना होगा l  आप सब से मेरा अनुरोध है कि जो भी वंचित तबका दिखे अगर आप सामर्थ हैं तो अपने सामर्थ्य अनुसार वंचित तबकों के मदद के लिए जरूर आगे आए l
कवि विक्रम क्रांतिकारी(विक्रम चौरसिया-अंतरराष्ट्रीय चिंतक)