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                   इस बार कुछ अलग ईद
May 25, 2020 • Brajesh Kumar Mourya • कविता

चलो इस बार कुछ अलग ईद मनाते हैं। 
सब मिलकर सबके लिए मनाते हैं।
जब हम सब मिलकर चाँद को देखें
तो उस चाँद पर सबको हक दें
चाँद के सामने जब सजदा करें
तो सजदे में सबके लिए दुआ करें
दुआ में सबके लिए बस यही माँगे
कि ए खुदा! खुशियों की रहमते
इस बार तू सबको अदा करें।
चलो इस बार कुछ अलग ईद मनाते हैं
सब मिलकर सबके लिए मनाते हैं
जब रसोई में सेवइयाँ बनाएँ
तो उसमें जरा अपनेपन का
मीठा सा एहसास भी मिलाएँ
जब सेवइयों में शक्कर घुलाएँ
तो दिलों में प्रेम का रस मिलाएँ।
चलो इस बार कुछ अलग ईद मनाते हैं।
सब मिलकर सबके लिए मनाते हैं।
जब इस ईद सबको 'ईद मुबारक' बोलें
तो दिल के बंद दरवाजों को भी खोलें
चलो पुराने गिले-शिकवों को भुला दें
और उन्हें भी 'ईद मुबारक' का तोहफा दें।
चलो इस बार कुछ अलग ईद मनाते हैं।
सब मिलकर सबके लिए मनाते हैं।
जब इफ्‍तार के लिए पकवान बनाएँ
तो उसमें से कुछ जरूरतमंदों को दे आएँ
अपने दिलों में भी सुकून का एहसास पाएँ
और जहाँ में खुशियों की रोशनी फैलाएँ।
चलो इस बार कुछ अलग ईद मनाते हैं।
सब मिलकर सबके लिए मनाते हैं।
जब खुदा के सामने सजदा करें
सजदे में उसका शुक्रिया अदा करें
तो उनको भी एक शुकराना अदा करें
जो हमें मुश्किल वक्‍त में मदद करें।
चलो इस बार कुछ अलग ईद मनाते हैं।
सब मिलकर सबके लिए मनाते हैं।
                                                - शिम्‍पी गुप्‍ता
                                    सिवनी मालवा जिला होशंगाबाद