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""चीन की दादागिरी नहीं चलेगी सुपर पावर का खुला समर्थन""
June 28, 2020 • Brajesh Kumar Mourya • लेख
वुहान से लेकर गलवान तक चीन के सभी  गुनाह का अब हिसाब करने का वक्त आ गया है। हमने देखा जैसा कि चीन ने कोरोना संक्रमण वुहान से फैलाकर पूरी दुनिया के लिए साजिश रची तो वही दूसरी तरफ गलवान में भारत के खिलाफ अतिक्रमण की साजिश रची और दूसरे पड़ोसी देशों को भी भड़का रहा है । लेकिन अब हमे लगता है कि चीन को भी यह महसूस होने लगा है कि भारत को  आंकने में बहुत बड़ी गलती कर दिया हू । क्योंकि अब भारत के साथ चीन विवाद में अमेरिका खुलकर साथ आ गया है । दोस्तों चीन को  इस बात की गलतफहमी हो गई थी कि वो भारत से पंगा लेगा और भारत डर जाएगा। लेकिन अब भारत अकेले नहीं हैं, सुपर पावर ने चीन के खिलाफ भारत का खुला समर्थन कर दिया ,वैसे भी आज के भारत खुद सक्षम है चीन से मुकाबला करने  में लेकिन जब सुपर पावर का साथ मिला तो और जबरदस्त तरीके से मुंह तोड़ जवाब दिया जाएगा ।
अमेरिका अब चीन के खिलाफ एशिया में अपनी सेना भेज रहा है जैसे ही अमेरिका के विदेश मंत्री का यह बयान आया हमने देखा कि पूरी दुनिया में खलबली मच गई। दोस्तों मुझे अब लगता है कि चीन के अतिक्रमण की दीवार गिरने वाली है ।
जैसा कि हम जानते हैं कि सेना के मामले में अमेरिका पूरे विश्व में पहले स्थान पर है ,वही अपना भारत भी चौथे स्थान पर है । ध्यान से देखें तो अगर हम अमेरिका की रक्षा बजट की बात करें तो 55 .27 लाख करोड़ रुपए अपने रक्षा बजट पर खर्च करता है अमेरिका, वही हमारा भारत भी अपने कुल बजट का 4.71 लाख करोड़ रुपए रक्षा पर खर्च करता है। अगर  हम पूरे आर्थिक स्थिति पर नजर डालें तो, अमेरिका की जीडीपी 1551.8 लाख करोड़ है जबकि भारत की जीडीपी 222.6 लाख करोड़ रुपए हैं अब आप सोच सकते हैं कि जब दो शक्तियां एक साथ मिलेगी तो चीन का हालात क्या होगा ? वैसे भी आज विश्व के लगभग अधिकतर देश अमेरिका के खिलाफ है कोरोना वायरस को लेकर बहुत कम सच्चा दोस्त है चीन का आज के वक्त में । आज हम देखे तो चमगादड़ चीन का विवाद‌ का कतार बहुत लंबी है । ध्यान से देखें तो चमगादड़ चीन का विवाद आज अमेरिका, भारत ,नेपाल ,उत्तर कोरिया ,दक्षिण कोरिया, जापान ,ताइवान, इंडोनेशिया ,मलेशिया, फिलीपींस ,भूटान ब्रूनेई के साथ भी कोई ना कोई विवाद है। जैसा कि अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने कहा कि भारत और दक्षिण पूर्व एशिया के लिए चीन बड़ा खतरा है, साथ ही चीन से वियतनाम ,इंडोनेशिया, मलेशिया ,फिलीपींस को भी  खतरा है इसलिए जहां भी चीन से खतरा नजर होगा वहां तैनात होगी अमेरिकी सेना ,यह भी कहा कि चीन से निपटने के लिए अमेरिकी सेना तैयार है । अब हम देख रहे हैं कि दुनिया में चीनी कंपनियों की लहर धीरे-धीरे खत्म हो रही है । हम देख रहे हैं कि अमेरिका यह कदम ऐसे समय उठा रहा है,जब चीन ने भारत में पूर्वी लद्दाख वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास तनावपूर्ण स्थिति पैदा कर दिया है, इसलिए भारत के साथ-साथ वियतनाम, इंडोनेशिया ,मलेशिया फिलीपींस ,और साउथ चाइना सी में खतरा बनाता दिखाई दे रहा है इसीलिए अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने चीन को भारत और दक्षिण पूर्व एशिया के लिए खतरा बता रहे हैं । इसी मद्देनजर अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने कहा कि इसी चीन के बढ़ते खतरे के लिए हम दुनिया भर में अपने सैनिकों की तैनाती कर रहे हैं। जैसा कि अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने कहा कि हम तय करेंगे कि हमारी तैनाती ऐसी हो कि पीएलए का मुकाबला किया जा सके यह हमारे समय की चुनौती है और हम सुनिश्चित करें कि हमारे पास इससे निपटने के लिए सभी संसाधन उचित जगह पर उपलब्ध हो इसीलिए हम जर्मनी में अपने सैनिकों की संख्या करीब 52000 से घटाकर 25 हजार  कर रहे हैं । आपको बताना जरूरी मुझे लग रहा है कि कैसे भारत और अमेरिका के रिश्तों में बदलाव आया है। वहीं अमेरिका है जिसने 1998 में पोखरण में परमाणु परीक्षण के बाद भारत पर पाबंदी लगाई थी. लेकिन हम देख रहे है कि 22 साल बाद अमेरिका भारत के साथ खड़ा आज है और साथ में साथ कदम मिलाकर चलने को तैयार है । जैसा कि हम जानते हैं दोस्तों की पिछले दिनों गलवान में हुए झड़प के बाद अमेरिका चीन के खिलाफ एशिया में अपनी सेना भेजेगा और चीन को सबक सिखाएगा ।अब देखना दोस्तों भारत की सीमा पर गुस्ताखी करने का क्या हश्र होता है, इस बात का अब चीन को बखूबी जवाब मिलेगा 
जब अब अपने हिंदुस्तान को सुपर पावर का खुला समर्थन मिल ही गया है तो अब डरने का क्या बात जब अमेरिका ने चीन के खिलाफ सेना भेजी रहा है तो अब कहीं ना कहीं चीन का गर्दन अब टूटेगा जरूर ।।
कवि विक्रम क्रांतिकारी (विक्रम चौरसिया -अंतर्राष्ट्रीय चिंतक)